त्योहार
Read in English2026 के हिंदू त्योहार और व्रत
Delhi के लिए वर्ष का हर त्योहार — हर एक की तारीख़ दिन के उस भाग से तय, जिसमें उसकी तिथि होनी चाहिए, तिथि के समय और हर तारीख़ के कारण के साथ।
2026 के मासिक व्रत
जनवरी 2026
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मकर संक्रांति · पोंगल
इस दिन 15:07 पर सूर्य मकर में प्रवेश करता है।
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वसंत पंचमी · सरस्वती पूजा
शुक्ल पंचमी: 23 जन॰, 02:28 से 24 जन॰, 01:46 तक
इस दिन सूर्योदय के समय शुक्ल पंचमी है।
फ़रवरी 2026
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कुंभ संक्रांति
इस दिन 04:08 पर सूर्य कुंभ में प्रवेश करता है।
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कृष्ण चतुर्दशी: 15 फ़र॰, 17:05 से 16 फ़र॰, 17:34 तक
इस दिन निशीथ काल (मध्यरात्रि) में कृष्ण चतुर्दशी है।
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सूर्य ग्रहण · वलयाकार सूर्य ग्रहण
वलयाकार सूर्य ग्रहण, सबसे अधिक 17:41 पर। यह यहाँ से नहीं दिखेगा, इसलिए इसे माना नहीं जाता और सूतक नहीं लगता।
मार्च 2026
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होलिका दहन · छोटी होली
पूर्णिमा: 2 मार्च, 17:56 से 3 मार्च, 17:07 तक
पूर्णिमा सूर्यास्त से पहले समाप्त होती है, पर दिन के साढ़े तीन प्रहर तक रहती है और उसके बाद की प्रतिपदा लंबी है, इसलिए शास्त्रीय नियम से होलिका दहन इसी शाम है।
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चंद्र ग्रहण · पूर्ण चंद्र ग्रहण
पूर्ण चंद्र ग्रहण, यहाँ 18:21 से 18:47 तक दिखेगा (चंद्रमा ग्रहण लगा हुआ ही उदय होता है)। सूतक 09:38 से; बच्चों, वृद्धों और रोगियों के लिए 15:27 से।
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होलिका दहन के अगले दिन।
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शीतला अष्टमी · बसौड़ा
कृष्ण अष्टमी: 11 मार्च, 01:54 से 12 मार्च, 04:19 तक
इस दिन सूर्योदय के समय कृष्ण अष्टमी है।
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मीन संक्रांति
इस दिन 01:03 पर सूर्य मीन में प्रवेश करता है।
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चैत्र नवरात्रि आरंभ · गुड़ी पड़वा · उगादि
शुक्ल प्रतिपदा: 19 मार्च, 06:53 से 20 मार्च, 04:52 तक
इस बार शुक्ल प्रतिपदा किसी भी दिन सूर्योदय के समय नहीं है, इसलिए जिस दिन यह आरंभ होती है उसी दिन मनाया जाता है।
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शुक्ल नवमी: 26 मार्च, 11:49 से 27 मार्च, 10:07 तक
शुक्ल नवमी दो दिन पूर्वाह्न में है; पहला दिन लिया जाता है।
अप्रैल 2026
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मेष संक्रांति · सौर नव वर्ष
इस दिन 09:32 पर सूर्य मेष में प्रवेश करता है।
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शुक्ल तृतीया: 19 अप्रैल, 10:49 से 20 अप्रैल, 07:28 तक
अगले सूर्योदय के बाद शुक्ल तृतीया तीन मुहूर्त से कम रहती है, इसलिए जिस दिन यह आरंभ होती है उसी दिन मनाया जाता है।
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शुक्ल तृतीया: 19 अप्रैल, 10:49 से 20 अप्रैल, 07:28 तक
इस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में शुक्ल तृतीया है।
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शुक्ल सप्तमी: 22 अप्रैल, 22:50 से 23 अप्रैल, 20:49 तक
इस दिन सूर्योदय के समय शुक्ल सप्तमी है।
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शुक्ल चतुर्दशी: 29 अप्रैल, 19:52 से 30 अप्रैल, 21:13 तक
इस दिन सूर्यास्त के समय शुक्ल चतुर्दशी है।
मई 2026
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वृषभ संक्रांति
इस दिन 06:22 पर सूर्य वृषभ में प्रवेश करता है।
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वट सावित्री व्रत · शनि जयंती
अमावस्या: 16 मई, 05:11 से 17 मई, 01:31 तक
इस दिन पूर्वाह्न में अमावस्या है।
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शुक्ल दशमी: 25 मई, 04:31 से 26 मई, 05:11 तक
इस दिन सूर्योदय के समय शुक्ल दशमी है और उसके बाद कम से कम तीन मुहूर्त रहती है।
जून 2026
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मिथुन संक्रांति
इस दिन 12:53 पर सूर्य मिथुन में प्रवेश करता है।
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पूर्णिमा: 29 जून, 03:06 से 30 जून, 05:26 तक
पूर्णिमा दो दिन सूर्योदय के समय है; पहला दिन लिया जाता है।
जुलाई 2026
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शुक्ल द्वितीया: 15 जुल॰, 11:51 से 16 जुल॰, 08:53 तक
इस दिन सूर्योदय के समय शुक्ल द्वितीया है।
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कर्क संक्रांति
इस दिन 23:39 पर सूर्य कर्क में प्रवेश करता है।
अगस्त 2026
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सूर्य ग्रहण · पूर्ण सूर्य ग्रहण
पूर्ण सूर्य ग्रहण, सबसे अधिक 23:15 पर। यह यहाँ से नहीं दिखेगा, इसलिए इसे माना नहीं जाता और सूतक नहीं लगता।
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सिंह संक्रांति
इस दिन 07:58 पर सूर्य सिंह में प्रवेश करता है।
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पूर्णिमा: 27 अग॰, 09:09 से 28 अग॰, 09:48 तक
इस दिन सूर्योदय के समय पूर्णिमा है और उसके बाद कम से कम तीन मुहूर्त रहती है।
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श्रावण पूर्णिमा के दिन या उससे पहले का शुक्रवार।
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चंद्र ग्रहण · आंशिक चंद्र ग्रहण
आंशिक चंद्र ग्रहण, सबसे अधिक 09:42 पर। यह यहाँ से नहीं दिखेगा, इसलिए इसे माना नहीं जाता और सूतक नहीं लगता।
सितंबर 2026
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कृष्ण अष्टमी: 4 सित॰, 02:25 से 5 सित॰, 00:14 तक
इस दिन निशीथ काल (मध्यरात्रि) में अष्टमी है।
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शुक्ल तृतीया: 13 सित॰, 07:08 से 14 सित॰, 07:07 तक
इस दिन सूर्योदय के समय शुक्ल तृतीया है।
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कन्या संक्रांति · विश्वकर्मा पूजा
इस दिन 07:52 पर सूर्य कन्या में प्रवेश करता है।
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अनंत चतुर्दशी · गणेश विसर्जन
शुक्ल चतुर्दशी: 24 सित॰, 23:18 से 25 सित॰, 23:07 तक
इस दिन सूर्योदय के समय शुक्ल चतुर्दशी है।
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कृष्ण प्रतिपदा: 26 सित॰, 22:19 से 27 सित॰, 20:59 तक
इस दिन अपराह्न में कृष्ण प्रतिपदा है।
अक्टूबर 2026
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शुक्ल प्रतिपदा: 10 अक्टू॰, 21:20 से 11 अक्टू॰, 21:31 तक
इस दिन सूर्योदय के समय शुक्ल प्रतिपदा है।
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तुला संक्रांति
इस दिन 19:51 पर सूर्य तुला में प्रवेश करता है।
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शुक्ल अष्टमी: 18 अक्टू॰, 08:28 से 19 अक्टू॰, 10:52 तक
इस दिन सूर्योदय के समय शुक्ल अष्टमी है।
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शुक्ल नवमी: 19 अक्टू॰, 10:52 से 20 अक्टू॰, 12:50 तक
शुक्ल नवमी दो दिन मध्याह्न में है; पहला दिन लिया जाता है।
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दशहरा · विजयादशमी
शुक्ल दशमी: 20 अक्टू॰, 12:50 से 21 अक्टू॰, 14:12 तक
शुक्ल दशमी दो दिन अपराह्न में है; पहला दिन लिया जाता है।
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शरद पूर्णिमा · कोजागरी पूजा
पूर्णिमा: 25 अक्टू॰, 11:56 से 26 अक्टू॰, 09:41 तक
इस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में पूर्णिमा है।
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कृष्ण चतुर्थी: 29 अक्टू॰, 01:07 से 29 अक्टू॰, 22:10 तक
इस दिन चंद्रोदय के समय कृष्ण चतुर्थी है।
नवंबर 2026
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कृष्ण अष्टमी: 1 नव॰, 14:52 से 2 नव॰, 13:11 तक
इस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में कृष्ण अष्टमी है।
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कृष्ण द्वादशी: 5 नव॰, 10:36 से 6 नव॰, 10:31 तक
इस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में कृष्ण द्वादशी है।
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कृष्ण त्रयोदशी: 6 नव॰, 10:31 से 7 नव॰, 10:48 तक
इस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में कृष्ण त्रयोदशी है।
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कृष्ण चतुर्दशी: 7 नव॰, 10:48 से 8 नव॰, 11:28 तक
इस दिन निशीथ काल (मध्यरात्रि) में कृष्ण चतुर्दशी है।
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दीवाली · लक्ष्मी पूजा
अमावस्या: 8 नव॰, 11:28 से 9 नव॰, 12:32 तक
इस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में अमावस्या है।
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नरक चतुर्दशी · छोटी दीवाली
कृष्ण चतुर्दशी: 7 नव॰, 10:48 से 8 नव॰, 11:28 तक
इस दिन अरुणोदय (सूर्योदय से पहले) के समय कृष्ण चतुर्दशी है।
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शुक्ल प्रतिपदा: 9 नव॰, 12:32 से 10 नव॰, 14:00 तक
इस दिन सूर्योदय के समय शुक्ल प्रतिपदा है।
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शुक्ल द्वितीया: 10 नव॰, 14:00 से 11 नव॰, 15:53 तक
शुक्ल द्वितीया दो दिन अपराह्न में है, इस दिन अधिक समय तक।
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वृश्चिक संक्रांति
इस दिन 19:43 पर सूर्य वृश्चिक में प्रवेश करता है।
दिसंबर 2026
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कृष्ण अष्टमी: 1 दिस॰, 00:12 से 1 दिस॰, 23:14 तक
इस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में कृष्ण अष्टमी है।
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धनु संक्रांति
इस दिन 10:25 पर सूर्य धनु में प्रवेश करता है।
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पूर्णिमा: 23 दिस॰, 10:47 से 24 दिस॰, 06:58 तक
इस बार पूर्णिमा किसी भी दिन सूर्योदय के समय नहीं है, इसलिए जिस दिन यह आरंभ होती है उसी दिन मनाया जाता है।
तारीख़ें कैसे तय होती हैं
त्योहारों की तिथियाँ उन्हीं नियमों से निकलती हैं जिनसे द्रिक पंचांग निकालता है, और नई दिल्ली के लिए उसके कैलेंडर से जाँची गई हैं: 2026 और 2027 का हर त्योहार और व्रत, और 2021 से 2031 तक हर वर्ष के बारह प्रमुख त्योहार। जहाँ कोई त्योहार दो दिन पड़ सकता है, उसके साथ छपा कारण ही वह नियम है जिसने निर्णय किया। जो क्षेत्रीय कैलेंडर महीने अलग ढंग से गिनते हैं या वैष्णव पद्धति मानते हैं, वे कुछ पर्व दूसरे दिन रख सकते हैं।