विवाह मुहूर्त
Read in Englishशुभ विवाह मुहूर्त 2026
Delhi के लिए 2026 की हर वह तारीख़ जो पंचांग शुद्धि पर खरी उतरती है, उसके समय के साथ। जिस महीने में कोई तारीख़ नहीं, उसके नीचे कारण लिखा है: सूर्य का महीना, चातुर्मास, या शुक्र या गुरु का अस्त होना।
2026 में विवाह की 59 तारीख़ें
अगली: शनिवार, 21 नवंबर 2026, 06:48 से 00:09 (22 नव॰) तक
जनवरी 2026
विवाह की कोई तारीख़ नहीं: शुक्र तारा अस्त है।
फ़रवरी 2026 11 तारीख़ें
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07:07 से 07:06 (6 फ़र॰) तक
उत्तरा फाल्गुनी · हस्त · कृष्ण चतुर्थी · कृष्ण पंचमी
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07:06 से 23:37 तक
हस्त · कृष्ण पंचमी
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00:08 (9 फ़र॰) से 05:03 (9 फ़र॰) तक
स्वाती · कृष्ण सप्तमी · कृष्ण अष्टमी
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07:55 से 01:42 (11 फ़र॰) तक
अनुराधा · कृष्ण नवमी
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20:20 से 03:06 (13 फ़र॰) तक
मूल · कृष्ण एकादशी
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18:16 से 03:18 (15 फ़र॰) तक
उत्तराषाढ़ा · कृष्ण त्रयोदशी
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20:52 से 06:55 (20 फ़र॰) तक
उत्तरा भाद्रपदा · शुक्ल तृतीया
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06:55 से 01:52 (21 फ़र॰) तक
उत्तरा भाद्रपदा · रेवती · शुक्ल तृतीया · शुक्ल चतुर्थी
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13:01 से 13:22 तक
रेवती · शुक्ल पंचमी
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01:29 (26 फ़र॰) से 06:49 (26 फ़र॰) तक
मृगशिरा · शुक्ल नवमी · शुक्ल दशमी
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06:49 से 12:12 तक
मृगशिरा · शुक्ल दशमी
मार्च 2026 8 तारीख़ें
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13:47 से 17:56 तक
मघा · शुक्ल चतुर्दशी
05:29 (3 मार्च) से 06:44 (3 मार्च) तक
मघा · पूर्णिमा
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06:44 से 07:32 तक
मघा · पूर्णिमा
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07:39 से 08:53 तक
उत्तरा फाल्गुनी · कृष्ण प्रतिपदा
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11:16 से 06:39 (8 मार्च) तक
स्वाती · कृष्ण चतुर्थी · कृष्ण पंचमी
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06:39 से 07:04 तक
स्वाती · कृष्ण पंचमी
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16:12 से 23:28 तक
अनुराधा · कृष्ण षष्ठी
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04:41 (12 मार्च) से 06:34 (12 मार्च) तक
मूल · कृष्ण नवमी
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06:34 से 09:59 तक
मूल · कृष्ण नवमी
अप्रैल 2026 9 तारीख़ें
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15:23 से 22:32 तक
उत्तरा भाद्रपदा · कृष्ण त्रयोदशी
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04:35 (20 अप्रैल) से 05:51 (20 अप्रैल) तक
रोहिणी · शुक्ल तृतीया
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05:51 से 17:50 तक
रोहिणी · शुक्ल तृतीया · शुक्ल चतुर्थी
04:15 (21 अप्रैल) से 05:50 (21 अप्रैल) तक
मृगशिरा · शुक्ल पंचमी
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05:50 से 12:31 तक
मृगशिरा · शुक्ल पंचमी
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02:11 (26 अप्रैल) से 05:45 (26 अप्रैल) तक
मघा · शुक्ल दशमी
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05:45 से 20:27 तक
मघा · शुक्ल दशमी · शुक्ल एकादशी
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21:19 से 21:36 तक
उत्तरा फाल्गुनी · शुक्ल द्वादशी
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21:05 से 05:42 (29 अप्रैल) तक
उत्तरा फाल्गुनी · हस्त · शुक्ल त्रयोदशी
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05:42 से 20:52 तक
हस्त · शुक्ल त्रयोदशी · शुक्ल चतुर्दशी
मई 2026 8 तारीख़ें
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10:01 से 21:13 तक
स्वाती · पूर्णिमा
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07:10 से 22:28 तक
अनुराधा · कृष्ण द्वितीया
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19:40 से 05:36 (6 मई) तक
मूल · कृष्ण चतुर्थी
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05:36 से 15:54 तक
मूल · कृष्ण चतुर्थी · कृष्ण पंचमी
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18:46 से 05:35 (8 मई) तक
उत्तराषाढ़ा · कृष्ण षष्ठी
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05:35 से 12:22 तक
उत्तराषाढ़ा · कृष्ण षष्ठी
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20:55 से 05:31 (14 मई) तक
उत्तरा भाद्रपदा · रेवती · कृष्ण द्वादशी
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05:31 से 17:00 तक
रेवती · कृष्ण द्वादशी · कृष्ण त्रयोदशी
जून 2026 8 तारीख़ें
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09:32 से 11:22 तक
उत्तरा फाल्गुनी · शुक्ल सप्तमी
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10:31 से 05:24 (23 जून) तक
हस्त · शुक्ल अष्टमी · शुक्ल नवमी
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05:24 से 10:14 तक
हस्त · शुक्ल नवमी
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13:59 से 05:24 (25 जून) तक
स्वाती · शुक्ल दशमी · शुक्ल एकादशी
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05:24 से 07:09 तक
स्वाती · शुक्ल एकादशी
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19:16 से 05:25 (27 जून) तक
अनुराधा · शुक्ल द्वादशी · शुक्ल त्रयोदशी
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05:25 से 22:11 तक
अनुराधा · शुक्ल त्रयोदशी
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16:18 से 04:04 (30 जून) तक
मूल · पूर्णिमा
जुलाई 2026 4 तारीख़ें
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06:52 से 16:05 तक
उत्तराषाढ़ा · कृष्ण प्रतिपदा · कृष्ण द्वितीया
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01:42 (7 जुल॰) से 05:29 (7 जुल॰) तक
उत्तरा भाद्रपदा · कृष्ण सप्तमी
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05:29 से 14:31 तक
उत्तरा भाद्रपदा · कृष्ण सप्तमी · कृष्ण अष्टमी
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00:06 (12 जुल॰) से 05:31 (12 जुल॰) तक
रोहिणी · कृष्ण द्वादशी · कृष्ण त्रयोदशी
अगस्त 2026
विवाह की कोई तारीख़ नहीं: गुरु तारा अस्त है · गुरु अभी उदय हुआ है (गुरु शिशुत्व, उदय के बाद के तीन दिन) · सूर्य कर्क राशि में है · सूर्य सिंह राशि में है।
सितंबर 2026
विवाह की कोई तारीख़ नहीं: सूर्य सिंह राशि में है · सूर्य कन्या राशि में है।
अक्टूबर 2026
विवाह की कोई तारीख़ नहीं: सूर्य कन्या राशि में है · शुक्र अस्त होने वाला है (शुक्र वृद्धत्व, अस्त से पहले के तीन दिन) · शुक्र तारा अस्त है · शुक्र अभी उदय हुआ है (शुक्र शिशुत्व, उदय के बाद के तीन दिन)।
नवंबर 2026 4 तारीख़ें
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06:48 से 00:09 (22 नव॰) तक
उत्तरा भाद्रपदा · रेवती · शुक्ल द्वादशी
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23:25 से 06:51 (25 नव॰) तक
रोहिणी · कृष्ण प्रतिपदा
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06:51 से 06:52 (26 नव॰) तक
रोहिणी · मृगशिरा · कृष्ण प्रतिपदा · कृष्ण द्वितीया
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06:52 से 17:47 तक
मृगशिरा · कृष्ण द्वितीया · कृष्ण तृतीया
दिसंबर 2026 7 तारीख़ें
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10:32 से 06:57 (3 दिस॰) तक
उत्तरा फाल्गुनी · कृष्ण नवमी · कृष्ण दशमी
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06:57 से 10:54 तक
उत्तरा फाल्गुनी · हस्त · कृष्ण दशमी
23:04 से 06:58 (4 दिस॰) तक
हस्त · कृष्ण एकादशी
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06:58 से 10:23 तक
हस्त · कृष्ण एकादशी
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11:49 से 07:00 (6 दिस॰) तक
स्वाती · कृष्ण द्वादशी · कृष्ण त्रयोदशी
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07:00 से 07:42 तक
स्वाती · कृष्ण त्रयोदशी
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03:05 (12 दिस॰) से 07:04 (12 दिस॰) तक
उत्तराषाढ़ा · शुक्ल तृतीया
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07:04 से 03:28 (13 दिस॰) तक
उत्तराषाढ़ा · शुक्ल तृतीया · शुक्ल चतुर्थी
जब विवाह नहीं होते
इनमें से हर एक जिस दिन को छूता है, उसे बंद कर देता है। जिस दिन इनका आरंभ या अंत पड़ता है, वह पूरा दिन बंद रहता है।
- शुक्र तारा अस्त है 11 दिस॰ 2025, 06:35 से 1 फ़र॰, 18:27 तक
- सूर्य धनु राशि में है (खरमास) 16 दिस॰ 2025, 04:20 से 14 जन॰, 15:07 तक
- सूर्य मीन राशि में है (खरमास) 15 मार्च, 01:03 से 14 अप्रैल, 09:33 तक
- अधिक मास (मलमास) 17 मई, 01:31 से 15 जून, 08:24 तक
- गुरु तारा अस्त है 15 जुल॰, 19:59 से 12 अग॰, 05:02 तक
- सूर्य कर्क, सिंह और कन्या राशि में है 16 जुल॰, 23:39 से 17 अक्टू॰, 19:52 तक
- चातुर्मास, देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक 24 जुल॰, 09:13 से 20 नव॰, 07:16 तक
- शुक्र तारा अस्त है 12 अक्टू॰, 18:19 से 29 अक्टू॰, 06:00 तक
- सूर्य धनु राशि में है (खरमास) 16 दिस॰, 10:25 से 14 जन॰ 2027, 21:10 तक
तारीख़ के बाद: वर-वधू
ये तारीख़ें पंचांग शुद्धि पर खरी हैं — आकाश की परीक्षा, जो शहर के हर जोड़े के लिए एक ही है। दूसरा भाग वर-वधू का अपना है: उनकी कुंडलियों का मिलान (36 गुणों का गुण मिलान और मंगल दोष), और पंडित जी द्वारा विवाह के समय का लग्न चुनना (लग्न शुद्धि)।
तारीख़ें कैसे चुनी जाती हैं
शुक्र या गुरु के अस्त रहने तक और उसके दोनों ओर तीन-तीन दिन; सूर्य के धनु या मीन (खरमास) अथवा कर्क, सिंह या कन्या राशि में रहने तक; अधिक मास में; और देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक चातुर्मास में — दिन बंद रहता है। शुक्र और गुरु तब तक अस्त माने जाते हैं जब तक वे सूर्य के इतने पास उदय या अस्त होते हैं कि शहर से दिखाई न दें।
खुले दिन का समय वह है जो विवाह के ग्यारह नक्षत्रों में से किसी में हो (रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तर भाद्रपद और रेवती — मघा, मूल और रेवती का गंडांत भाग छोड़कर), नौ अशुभ योगों से बाहर, और भद्रा तथा चार स्थिर करणों से बाहर। पाँच मिनट से छोटे समय छोड़ दिए जाते हैं। पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय पिछले दिन के नीचे, अपनी तारीख़ के साथ, लिखा है।
नई दिल्ली के लिए द्रिकपंचांग से 2026 और 2027 के हर दिन पर, और 2023 से 2027 तक शुक्र और गुरु के अस्त के समय पर जाँचा गया। इन दो वर्षों में सात दिनों पर हम जान-बूझकर अलग हैं: द्रिकपंचांग दिन के केवल पहले दो नक्षत्र और योग देखता है, हम हर एक देखते हैं, इसलिए जो समय वहाँ विष्कंभ या गंड योग में चला जाता है, वह यहाँ वहीं रुक जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
2026 में कितने विवाह मुहूर्त हैं?
Delhi के लिए 2026 में 59 दिन पंचांग शुद्धि पर खरे हैं — पहला गुरुवार, 5 फ़रवरी 2026 को और अंतिम शनिवार, 12 दिसंबर 2026 को। हर एक ऊपर उसके समय के साथ दिया है।
खरमास और चातुर्मास में विवाह की तारीख़ें क्यों नहीं होतीं?
मुहूर्त ग्रंथ उन महीनों को बंद रखते हैं जिनमें सूर्य धनु और मीन राशि में रहता है (खरमास), और देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक के चार महीनों को (चातुर्मास)। देवउठनी एकादशी के बाद विवाह का मौसम फिर खुलता है।
शुक्र अस्त क्या है, और इसमें विवाह क्यों नहीं होते?
शुक्र तब अस्त होता है जब वह सूर्य के इतने पास होता है कि दिखाई नहीं देता। मुहूर्त चिंतामणि और धर्मसिंधु उस समय विवाह वर्जित करते हैं, और उसके अस्त होने से पहले तथा उदय के बाद के तीन-तीन दिनों में भी; गुरु के लिए भी यही नियम है। शुक्र अस्त: 10 दिसंबर 2025 से 1 फ़रवरी तक; 12 अक्टूबर से 28 अक्टूबर तक।
क्या इस सूची की कोई तारीख़ विवाह तय करने के लिए काफ़ी है?
यह पहला चरण है। यह सूची पंचांग शुद्धि है, और Delhi में सबके लिए एक ही है। परिवार वर-वधू की कुंडलियाँ भी मिलाते हैं और पंडित जी से विवाह के समय का लग्न चुनवाते हैं।