विवाह मुहूर्त
Read in Englishशुभ विवाह मुहूर्त 2030
Delhi के लिए 2030 की हर वह तारीख़ जो पंचांग शुद्धि पर खरी उतरती है, उसके समय के साथ। जिस महीने में कोई तारीख़ नहीं, उसके नीचे कारण लिखा है: सूर्य का महीना, चातुर्मास, या शुक्र या गुरु का अस्त होना।
2030 में विवाह की 77 तारीख़ें
अगली: मंगलवार, 15 जनवरी 2030, 16:31 से 07:15 (16 जन॰) तक
जनवरी 2030 11 तारीख़ें
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16:31 से 07:15 (16 जन॰) तक
रोहिणी · शुक्ल द्वादशी
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07:15 से 07:14 (17 जन॰) तक
रोहिणी · मृगशिरा · शुक्ल द्वादशी · शुक्ल त्रयोदशी
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07:14 से 15:06 तक
मृगशिरा · शुक्ल त्रयोदशी
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00:04 (22 जन॰) से 07:13 (22 जन॰) तक
मघा · कृष्ण तृतीया
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07:13 से 08:04 तक
मघा · कृष्ण तृतीया
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17:04 से 18:19 तक
उत्तरा फाल्गुनी · कृष्ण चतुर्थी · कृष्ण पंचमी
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15:47 से 07:12 (25 जन॰) तक
उत्तरा फाल्गुनी · हस्त · कृष्ण पंचमी · कृष्ण षष्ठी
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07:12 से 14:40 तक
हस्त · कृष्ण षष्ठी
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11:00 से 19:36 तक
अनुराधा · कृष्ण दशमी
06:33 (29 जन॰) से 07:11 (29 जन॰) तक
अनुराधा · कृष्ण एकादशी
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07:11 से 09:35 तक
अनुराधा · कृष्ण एकादशी
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19:53 से 06:53 (31 जन॰) तक
मूल · कृष्ण द्वादशी · कृष्ण त्रयोदशी
फ़रवरी 2030 13 तारीख़ें
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05:45 (6 फ़र॰) से 07:06 (6 फ़र॰) तक
उत्तरा भाद्रपदा · शुक्ल चतुर्थी
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07:06 से 09:08 तक
उत्तरा भाद्रपदा · शुक्ल चतुर्थी
21:41 से 07:05 (7 फ़र॰) तक
उत्तरा भाद्रपदा · शुक्ल पंचमी
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07:05 से 03:13 (8 फ़र॰) तक
उत्तरा भाद्रपदा · रेवती · शुक्ल पंचमी · शुक्ल षष्ठी
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18:41 से 07:02 (12 फ़र॰) तक
रोहिणी · शुक्ल नवमी
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07:02 से 09:44 तक
रोहिणी · शुक्ल नवमी · शुक्ल दशमी
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00:19 (20 फ़र॰) से 06:55 (20 फ़र॰) तक
उत्तरा फाल्गुनी · कृष्ण द्वितीया
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06:55 से 18:50 तक
उत्तरा फाल्गुनी · कृष्ण द्वितीया · कृष्ण तृतीया
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19:23 से 06:52 (23 फ़र॰) तक
स्वाती · कृष्ण पंचमी · कृष्ण षष्ठी
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06:52 से 17:47 तक
स्वाती · कृष्ण षष्ठी
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05:42 (25 फ़र॰) से 06:50 (25 फ़र॰) तक
अनुराधा · कृष्ण अष्टमी
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06:50 से 15:04 तक
अनुराधा · कृष्ण अष्टमी
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00:32 (27 फ़र॰) से 04:03 (27 फ़र॰) तक
मूल · कृष्ण दशमी
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20:05 से 06:46 (1 मार्च) तक
उत्तराषाढ़ा · कृष्ण द्वादशी
मार्च 2030 7 तारीख़ें
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06:46 से 12:15 तक
उत्तराषाढ़ा · कृष्ण द्वादशी
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14:15 से 06:41 (6 मार्च) तक
उत्तरा भाद्रपदा · शुक्ल द्वितीया
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06:41 से 06:40 (7 मार्च) तक
उत्तरा भाद्रपदा · रेवती · शुक्ल द्वितीया · शुक्ल तृतीया
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06:40 से 11:31 तक
रेवती · शुक्ल तृतीया
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16:24 से 01:05 (12 मार्च) तक
रोहिणी · शुक्ल सप्तमी
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14:18 से 06:33 (13 मार्च) तक
मृगशिरा · शुक्ल अष्टमी · शुक्ल नवमी
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06:33 से 08:31 तक
मृगशिरा · शुक्ल नवमी
अप्रैल 2030 9 तारीख़ें
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20:21 से 05:55 (16 अप्रैल) तक
उत्तरा फाल्गुनी · शुक्ल त्रयोदशी
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05:55 से 14:53 तक
उत्तरा फाल्गुनी · शुक्ल त्रयोदशी
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11:12 से 12:18 तक
हस्त · शुक्ल चतुर्दशी
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03:08 (19 अप्रैल) से 05:52 (19 अप्रैल) तक
स्वाती · कृष्ण प्रतिपदा · कृष्ण द्वितीया
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05:52 से 10:27 तक
स्वाती · कृष्ण द्वितीया
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22:10 से 05:08 (21 अप्रैल) तक
अनुराधा · कृष्ण चतुर्थी
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11:58 से 01:14 (23 अप्रैल) तक
मूल · कृष्ण पंचमी · कृष्ण षष्ठी
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01:24 (24 अप्रैल) से 05:47 (24 अप्रैल) तक
उत्तराषाढ़ा · कृष्ण सप्तमी
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05:47 से 23:32 तक
उत्तराषाढ़ा · कृष्ण सप्तमी · कृष्ण अष्टमी
मई 2030 15 तारीख़ें
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16:31 से 05:31 (5 मई) तक
रोहिणी · शुक्ल द्वितीया · शुक्ल तृतीया
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06:35 से 16:43 तक
मृगशिरा · शुक्ल चतुर्थी
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12:30 से 05:32 (12 मई) तक
मघा · शुक्ल नवमी
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05:32 से 05:55 तक
मघा · शुक्ल नवमी
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06:01 से 19:33 तक
उत्तरा फाल्गुनी · शुक्ल दशमी · शुक्ल एकादशी
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21:49 से 02:40 (15 मई) तक
हस्त · शुक्ल द्वादशी
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14:06 से 20:37 तक
स्वाती · शुक्ल चतुर्दशी
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05:41 से 15:27 तक
अनुराधा · कृष्ण प्रतिपदा · कृष्ण द्वितीया
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18:04 से 19:43 तक
मूल · कृष्ण तृतीया
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06:07 से 10:16 तक
मूल · कृष्ण चतुर्थी
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08:20 से 05:27 (22 मई) तक
उत्तराषाढ़ा · कृष्ण पंचमी · कृष्ण षष्ठी
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05:27 से 07:02 तक
उत्तराषाढ़ा · कृष्ण षष्ठी
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08:50 से 11:39 तक
उत्तरा भाद्रपदा · कृष्ण दशमी
00:20 (27 मई) से 05:25 (27 मई) तक
उत्तरा भाद्रपदा · कृष्ण एकादशी
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05:25 से 05:24 (28 मई) तक
उत्तरा भाद्रपदा · रेवती · कृष्ण एकादशी · कृष्ण द्वादशी
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05:24 से 06:49 तक
रेवती · कृष्ण द्वादशी
जून 2030 17 तारीख़ें
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01:07 (2 जून) से 05:23 (2 जून) तक
रोहिणी · मृगशिरा · शुक्ल प्रतिपदा
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05:23 से 13:20 तक
मृगशिरा · शुक्ल प्रतिपदा
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19:05 से 05:22 (8 जून) तक
मघा · शुक्ल षष्ठी · शुक्ल सप्तमी
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05:22 से 13:37 तक
मघा · शुक्ल सप्तमी
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13:41 से 05:22 (10 जून) तक
उत्तरा फाल्गुनी · शुक्ल अष्टमी · शुक्ल नवमी
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05:22 से 10:01 तक
उत्तरा फाल्गुनी · शुक्ल नवमी
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07:25 से 11:49 तक
हस्त · शुक्ल दशमी
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00:50 (13 जून) से 05:22 (13 जून) तक
स्वाती · शुक्ल द्वादशी
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05:22 से 07:44 तक
स्वाती · शुक्ल द्वादशी
05:07 (14 जून) से 05:23 (14 जून) तक
अनुराधा · शुक्ल त्रयोदशी
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05:23 से 02:19 (15 जून) तक
अनुराधा · शुक्ल त्रयोदशी · शुक्ल चतुर्दशी
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04:50 (16 जून) से 05:23 (16 जून) तक
मूल · कृष्ण प्रतिपदा
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05:23 से 20:49 तक
मूल · कृष्ण प्रतिपदा · कृष्ण द्वितीया
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18:26 से 04:01 (18 जून) तक
उत्तराषाढ़ा · कृष्ण तृतीया
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14:42 से 16:31 तक
उत्तराषाढ़ा · कृष्ण चतुर्थी
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15:43 से 05:24 (23 जून) तक
उत्तरा भाद्रपदा · कृष्ण अष्टमी
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05:24 से 05:24 (24 जून) तक
उत्तरा भाद्रपदा · रेवती · कृष्ण अष्टमी · कृष्ण नवमी
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05:24 से 13:10 तक
रेवती · कृष्ण नवमी · कृष्ण दशमी
जुलाई 2030 5 तारीख़ें
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07:12 से 19:14 तक
मघा · शुक्ल पंचमी
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19:33 से 05:29 (7 जुल॰) तक
उत्तरा फाल्गुनी · शुक्ल षष्ठी
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05:29 से 17:21 तक
उत्तरा फाल्गुनी · शुक्ल षष्ठी · शुक्ल सप्तमी
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16:32 से 18:44 तक
हस्त · शुक्ल अष्टमी
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17:37 से 05:30 (10 जुल॰) तक
स्वाती · शुक्ल नवमी · शुक्ल दशमी
अगस्त 2030
विवाह की कोई तारीख़ नहीं: सूर्य कर्क राशि में है · सूर्य सिंह राशि में है।
सितंबर 2030
विवाह की कोई तारीख़ नहीं: सूर्य सिंह राशि में है · सूर्य कन्या राशि में है · शुक्र अस्त होने वाला है (शुक्र वृद्धत्व, अस्त से पहले के तीन दिन) · शुक्र तारा अस्त है।
अक्टूबर 2030
विवाह की कोई तारीख़ नहीं: शुक्र तारा अस्त है।
नवंबर 2030
विवाह की कोई तारीख़ नहीं: शुक्र तारा अस्त है · शुक्र अभी उदय हुआ है (शुक्र शिशुत्व, उदय के बाद के तीन दिन) · गुरु तारा अस्त है।
दिसंबर 2030
विवाह की कोई तारीख़ नहीं: गुरु तारा अस्त है · गुरु अभी उदय हुआ है (गुरु शिशुत्व, उदय के बाद के तीन दिन) · सूर्य धनु राशि में है (खरमास)।
जब विवाह नहीं होते
इनमें से हर एक जिस दिन को छूता है, उसे बंद कर देता है। जिस दिन इनका आरंभ या अंत पड़ता है, वह पूरा दिन बंद रहता है।
- सूर्य धनु राशि में है (खरमास) 16 दिस॰ 2029, 04:50 से 14 जन॰, 15:35 तक
- शुक्र तारा अस्त है 4 जन॰, 17:59 से 9 जन॰, 06:45 तक
- सूर्य मीन राशि में है (खरमास) 15 मार्च, 01:29 से 14 अप्रैल, 09:58 तक
- चातुर्मास, देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक 10 जुल॰, 23:07 से 5 नव॰, 03:35 तक
- सूर्य कर्क, सिंह और कन्या राशि में है 17 जुल॰, 00:15 से 17 अक्टू॰, 20:40 तक
- शुक्र तारा अस्त है 28 सित॰, 05:46 से 20 नव॰, 17:53 तक
- गुरु तारा अस्त है 18 नव॰, 18:02 से 13 दिस॰, 06:20 तक
- सूर्य धनु राशि में है (खरमास) 16 दिस॰, 11:08 से 14 जन॰ 2031, 21:52 तक
तारीख़ के बाद: वर-वधू
ये तारीख़ें पंचांग शुद्धि पर खरी हैं — आकाश की परीक्षा, जो शहर के हर जोड़े के लिए एक ही है। दूसरा भाग वर-वधू का अपना है: उनकी कुंडलियों का मिलान (36 गुणों का गुण मिलान और मंगल दोष), और पंडित जी द्वारा विवाह के समय का लग्न चुनना (लग्न शुद्धि)।
तारीख़ें कैसे चुनी जाती हैं
शुक्र या गुरु के अस्त रहने तक और उसके दोनों ओर तीन-तीन दिन; सूर्य के धनु या मीन (खरमास) अथवा कर्क, सिंह या कन्या राशि में रहने तक; अधिक मास में; और देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक चातुर्मास में — दिन बंद रहता है। शुक्र और गुरु तब तक अस्त माने जाते हैं जब तक वे सूर्य के इतने पास उदय या अस्त होते हैं कि शहर से दिखाई न दें।
खुले दिन का समय वह है जो विवाह के ग्यारह नक्षत्रों में से किसी में हो (रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तर भाद्रपद और रेवती — मघा, मूल और रेवती का गंडांत भाग छोड़कर), नौ अशुभ योगों से बाहर, और भद्रा तथा चार स्थिर करणों से बाहर। पाँच मिनट से छोटे समय छोड़ दिए जाते हैं। पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय पिछले दिन के नीचे, अपनी तारीख़ के साथ, लिखा है।
नई दिल्ली के लिए द्रिकपंचांग से 2026 और 2027 के हर दिन पर, और 2023 से 2027 तक शुक्र और गुरु के अस्त के समय पर जाँचा गया। इन दो वर्षों में सात दिनों पर हम जान-बूझकर अलग हैं: द्रिकपंचांग दिन के केवल पहले दो नक्षत्र और योग देखता है, हम हर एक देखते हैं, इसलिए जो समय वहाँ विष्कंभ या गंड योग में चला जाता है, वह यहाँ वहीं रुक जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
2030 में कितने विवाह मुहूर्त हैं?
Delhi के लिए 2030 में 77 दिन पंचांग शुद्धि पर खरे हैं — पहला मंगलवार, 15 जनवरी 2030 को और अंतिम मंगलवार, 9 जुलाई 2030 को। हर एक ऊपर उसके समय के साथ दिया है।
खरमास और चातुर्मास में विवाह की तारीख़ें क्यों नहीं होतीं?
मुहूर्त ग्रंथ उन महीनों को बंद रखते हैं जिनमें सूर्य धनु और मीन राशि में रहता है (खरमास), और देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक के चार महीनों को (चातुर्मास)। देवउठनी एकादशी के बाद विवाह का मौसम फिर खुलता है।
शुक्र अस्त क्या है, और इसमें विवाह क्यों नहीं होते?
शुक्र तब अस्त होता है जब वह सूर्य के इतने पास होता है कि दिखाई नहीं देता। मुहूर्त चिंतामणि और धर्मसिंधु उस समय विवाह वर्जित करते हैं, और उसके अस्त होने से पहले तथा उदय के बाद के तीन-तीन दिनों में भी; गुरु के लिए भी यही नियम है। शुक्र अस्त: 4 जनवरी से 8 जनवरी तक; 27 सितंबर से 20 नवंबर तक।
क्या इस सूची की कोई तारीख़ विवाह तय करने के लिए काफ़ी है?
यह पहला चरण है। यह सूची पंचांग शुद्धि है, और Delhi में सबके लिए एक ही है। परिवार वर-वधू की कुंडलियाँ भी मिलाते हैं और पंडित जी से विवाह के समय का लग्न चुनवाते हैं।