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विवाह मुहूर्त

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शुभ विवाह मुहूर्त 2025

Delhi के लिए 2025 की हर वह तारीख़ जो पंचांग शुद्धि पर खरी उतरती है, उसके समय के साथ। जिस महीने में कोई तारीख़ नहीं, उसके नीचे कारण लिखा है: सूर्य का महीना, चातुर्मास, या शुक्र या गुरु का अस्त होना।

Delhi, India के लिए तारीख़ें।

2025 में विवाह की 74 तारीख़ें

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जनवरी 2025 10 तारीख़ें

  1. 04:07 (17 जन॰) से 07:14 (17 जन॰) तक

    मघा · कृष्ण चतुर्थी

  2. 07:14 से 12:45 तक

    मघा · कृष्ण चतुर्थी

  3. 14:52 से 01:16 (19 जन॰) तक

    उत्तरा फाल्गुनी · कृष्ण पंचमी

  4. 01:57 (20 जन॰) से 07:14 (20 जन॰) तक

    हस्त · कृष्ण षष्ठी

  5. 07:14 से 09:59 तक

    हस्त · कृष्ण षष्ठी

  6. 23:37 से 03:49 (22 जन॰) तक

    स्वाती · कृष्ण अष्टमी

  7. 05:08 (24 जन॰) से 06:36 (24 जन॰) तक

    अनुराधा · कृष्ण दशमी

  8. 19:26 से 07:08 (25 जन॰) तक

    अनुराधा · कृष्ण एकादशी

  9. 03:34 (27 जन॰) से 07:11 (27 जन॰) तक

    मूल · कृष्ण त्रयोदशी

  10. 07:11 से 09:02 तक

    मूल · कृष्ण त्रयोदशी

फ़रवरी 2025 14 तारीख़ें

  1. 09:15 से 07:08 (3 फ़र॰) तक

    उत्तरा भाद्रपदा · रेवती · शुक्ल पंचमी · शुक्ल षष्ठी

  2. 07:08 से 17:41 तक

    रेवती · शुक्ल षष्ठी

  3. 19:30 से 07:05 (7 फ़र॰) तक

    रोहिणी · शुक्ल नवमी · शुक्ल दशमी

  4. 07:05 से 16:17 तक

    रोहिणी · शुक्ल दशमी

  5. 01:59 (13 फ़र॰) से 07:01 (13 फ़र॰) तक

    मघा · कृष्ण प्रतिपदा

  6. 07:01 से 07:31 तक

    मघा · कृष्ण प्रतिपदा

  7. 23:10 से 06:59 (15 फ़र॰) तक

    उत्तरा फाल्गुनी · कृष्ण तृतीया

  8. 06:59 से 10:50 तक

    उत्तरा फाल्गुनी · कृष्ण तृतीया

    23:53 से 06:58 (16 फ़र॰) तक

    उत्तरा फाल्गुनी · हस्त · कृष्ण चतुर्थी

  9. 06:58 से 08:06 तक

    हस्त · कृष्ण चतुर्थी

  10. 09:52 से 06:56 (19 फ़र॰) तक

    स्वाती · कृष्ण षष्ठी

  11. 06:56 से 07:33 तक

    स्वाती · कृष्ण षष्ठी

  12. 11:59 से 15:54 तक

    अनुराधा · कृष्ण नवमी

  13. 13:56 से 18:43 तक

    मूल · कृष्ण एकादशी

  14. 08:15 से 18:31 तक

    उत्तराषाढ़ा · कृष्ण द्वादशी · कृष्ण त्रयोदशी

मार्च 2025 5 तारीख़ें

  1. 11:23 से 06:45 (2 मार्च) तक

    उत्तरा भाद्रपदा · शुक्ल द्वितीया · शुक्ल तृतीया

  2. 06:45 से 01:14 (3 मार्च) तक

    उत्तरा भाद्रपदा · रेवती · शुक्ल तृतीया · शुक्ल चतुर्थी

  3. 22:02 से 06:40 (7 मार्च) तक

    रोहिणी · मृगशिरा · शुक्ल अष्टमी

  4. 06:40 से 23:32 तक

    मृगशिरा · शुक्ल अष्टमी · शुक्ल नवमी

  5. 08:43 से 04:06 (13 मार्च) तक

    मघा · शुक्ल त्रयोदशी · शुक्ल चतुर्दशी

अप्रैल 2025 9 तारीख़ें

  1. 22:38 से 00:14 (15 अप्रैल) तक

    स्वाती · कृष्ण द्वितीया

  2. 00:18 (17 अप्रैल) से 05:53 (17 अप्रैल) तक

    अनुराधा · कृष्ण चतुर्थी

  3. 01:03 (19 अप्रैल) से 05:51 (19 अप्रैल) तक

    मूल · कृष्ण षष्ठी

  4. 05:51 से 10:21 तक

    मूल · कृष्ण षष्ठी

  5. 11:48 से 05:49 (21 अप्रैल) तक

    उत्तराषाढ़ा · कृष्ण सप्तमी · कृष्ण अष्टमी

  6. 05:49 से 12:37 तक

    उत्तराषाढ़ा · कृष्ण अष्टमी

  7. 08:54 से 12:31 तक

    उत्तरा भाद्रपदा · कृष्ण द्वादशी · कृष्ण त्रयोदशी

  8. 18:47 से 05:41 (30 अप्रैल) तक

    रोहिणी · शुक्ल तृतीया

  9. 05:41 से 12:01 तक

    रोहिणी · शुक्ल तृतीया

मई 2025 15 तारीख़ें

  1. 11:24 से 14:21 तक

    मृगशिरा · शुक्ल पंचमी

  2. 20:29 से 05:36 (6 मई) तक

    मघा · शुक्ल नवमी

  3. 05:36 से 15:52 तक

    मघा · शुक्ल नवमी · शुक्ल दशमी

  4. 12:30 से 01:57 (9 मई) तक

    उत्तरा फाल्गुनी · हस्त · शुक्ल द्वादशी

  5. 03:15 (11 मई) से 04:01 (11 मई) तक

    स्वाती · शुक्ल चतुर्दशी

  6. 06:34 से 11:47 तक

    अनुराधा · कृष्ण द्वितीया

  7. 04:03 (16 मई) से 05:29 (16 मई) तक

    मूल · कृष्ण चतुर्थी

  8. 05:29 से 16:08 तक

    मूल · कृष्ण चतुर्थी

  9. 17:44 से 05:28 (18 मई) तक

    उत्तराषाढ़ा · कृष्ण पंचमी

  10. 05:28 से 18:53 तक

    उत्तराषाढ़ा · कृष्ण पंचमी · कृष्ण षष्ठी

  11. 01:13 (23 मई) से 05:26 (23 मई) तक

    उत्तरा भाद्रपदा · कृष्ण एकादशी

  12. 05:26 से 05:26 (24 मई) तक

    उत्तरा भाद्रपदा · रेवती · कृष्ण एकादशी · कृष्ण द्वादशी

  13. 05:26 से 08:22 तक

    रेवती · कृष्ण द्वादशी

  14. 18:46 से 05:24 (28 मई) तक

    रोहिणी · मृगशिरा · शुक्ल प्रतिपदा · शुक्ल द्वितीया

  15. 05:24 से 19:09 तक

    मृगशिरा · शुक्ल द्वितीया

जून 2025 5 तारीख़ें

  1. 08:20 से 20:36 तक

    मघा · शुक्ल सप्तमी

  2. 08:29 से 05:23 (5 जून) तक

    उत्तरा फाल्गुनी · हस्त · शुक्ल नवमी · शुक्ल दशमी

  3. 05:23 से 09:14 तक

    हस्त · शुक्ल दशमी

  4. 09:40 से 11:17 तक

    स्वाती · शुक्ल द्वादशी

  5. 12:18 से 12:42 तक

    स्वाती · शुक्ल त्रयोदशी

जुलाई 2025

विवाह की कोई तारीख़ नहीं: गुरु तारा अस्त है · गुरु अभी उदय हुआ है (गुरु शिशुत्व, उदय के बाद के तीन दिन) · चातुर्मास, देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक · सूर्य कर्क राशि में है।

अगस्त 2025

विवाह की कोई तारीख़ नहीं: सूर्य कर्क राशि में है · सूर्य सिंह राशि में है।

सितंबर 2025

विवाह की कोई तारीख़ नहीं: सूर्य सिंह राशि में है · सूर्य कन्या राशि में है।

अक्टूबर 2025

विवाह की कोई तारीख़ नहीं: सूर्य कन्या राशि में है · चातुर्मास, देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक।

नवंबर 2025 13 तारीख़ें

  1. 23:11 से 06:34 (3 नव॰) तक

    उत्तरा भाद्रपदा · शुक्ल द्वादशी · शुक्ल त्रयोदशी

  2. 06:34 से 19:40 तक

    उत्तरा भाद्रपदा · रेवती · शुक्ल त्रयोदशी

  3. 07:33 से 22:03 तक

    मृगशिरा · कृष्ण चतुर्थी

  4. 00:51 (13 नव॰) से 06:42 (13 नव॰) तक

    मघा · कृष्ण नवमी

  5. 06:42 से 19:38 तक

    मघा · कृष्ण नवमी

  6. 06:46 से 02:11 (17 नव॰) तक

    हस्त · कृष्ण द्वादशी

  7. 05:02 (18 नव॰) से 06:46 (18 नव॰) तक

    स्वाती · कृष्ण त्रयोदशी

  8. 06:46 से 07:13 तक

    स्वाती · कृष्ण त्रयोदशी

  9. 10:43 से 13:56 तक

    अनुराधा · शुक्ल प्रतिपदा

  10. 23:27 से 06:50 (23 नव॰) तक

    मूल · शुक्ल तृतीया

  11. 06:50 से 12:09 तक

    मूल · शुक्ल तृतीया

  12. 12:50 से 23:58 तक

    उत्तराषाढ़ा · शुक्ल पंचमी · शुक्ल षष्ठी

  13. 07:12 से 04:22 (1 दिस॰) तक

    उत्तरा भाद्रपदा · रेवती · शुक्ल दशमी · शुक्ल एकादशी

दिसंबर 2025 3 तारीख़ें

  1. 18:41 से 06:59 (5 दिस॰) तक

    रोहिणी · पूर्णिमा · कृष्ण प्रतिपदा

  2. 06:59 से 07:00 (6 दिस॰) तक

    रोहिणी · मृगशिरा · कृष्ण प्रतिपदा · कृष्ण द्वितीया

  3. 07:00 से 08:49 तक

    मृगशिरा · कृष्ण द्वितीया

जब विवाह नहीं होते

इनमें से हर एक जिस दिन को छूता है, उसे बंद कर देता है। जिस दिन इनका आरंभ या अंत पड़ता है, वह पूरा दिन बंद रहता है।

  • सूर्य धनु राशि में है (खरमास) 15 दिस॰ 2024, 22:11 से 14 जन॰, 08:56 तक
  • सूर्य मीन राशि में है (खरमास) 14 मार्च, 18:51 से 14 अप्रैल, 03:21 तक
  • शुक्र तारा अस्त है 20 मार्च, 18:53 से 23 मार्च, 05:52 तक
  • गुरु तारा अस्त है 12 जून, 19:57 से 9 जुल॰, 04:44 तक
  • चातुर्मास, देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक 5 जुल॰, 18:59 से 1 नव॰, 09:12 तक
  • सूर्य कर्क, सिंह और कन्या राशि में है 16 जुल॰, 17:32 से 17 अक्टू॰, 13:46 तक
  • शुक्र तारा अस्त है 11 दिस॰, 06:35 से 1 फ़र॰ 2026, 18:27 तक
  • सूर्य धनु राशि में है (खरमास) 16 दिस॰, 04:20 से 14 जन॰ 2026, 15:07 तक

तारीख़ के बाद: वर-वधू

ये तारीख़ें पंचांग शुद्धि पर खरी हैं — आकाश की परीक्षा, जो शहर के हर जोड़े के लिए एक ही है। दूसरा भाग वर-वधू का अपना है: उनकी कुंडलियों का मिलान (36 गुणों का गुण मिलान और मंगल दोष), और पंडित जी द्वारा विवाह के समय का लग्न चुनना (लग्न शुद्धि)।

दो कुंडलियाँ मिलाएँ

तारीख़ें कैसे चुनी जाती हैं

शुक्र या गुरु के अस्त रहने तक और उसके दोनों ओर तीन-तीन दिन; सूर्य के धनु या मीन (खरमास) अथवा कर्क, सिंह या कन्या राशि में रहने तक; अधिक मास में; और देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक चातुर्मास में — दिन बंद रहता है। शुक्र और गुरु तब तक अस्त माने जाते हैं जब तक वे सूर्य के इतने पास उदय या अस्त होते हैं कि शहर से दिखाई न दें।

खुले दिन का समय वह है जो विवाह के ग्यारह नक्षत्रों में से किसी में हो (रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तर फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तर भाद्रपद और रेवती — मघा, मूल और रेवती का गंडांत भाग छोड़कर), नौ अशुभ योगों से बाहर, और भद्रा तथा चार स्थिर करणों से बाहर। पाँच मिनट से छोटे समय छोड़ दिए जाते हैं। पंचांग का दिन सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है, इसलिए आधी रात के बाद का समय पिछले दिन के नीचे, अपनी तारीख़ के साथ, लिखा है।

नई दिल्ली के लिए द्रिकपंचांग से 2026 और 2027 के हर दिन पर, और 2023 से 2027 तक शुक्र और गुरु के अस्त के समय पर जाँचा गया। इन दो वर्षों में सात दिनों पर हम जान-बूझकर अलग हैं: द्रिकपंचांग दिन के केवल पहले दो नक्षत्र और योग देखता है, हम हर एक देखते हैं, इसलिए जो समय वहाँ विष्कंभ या गंड योग में चला जाता है, वह यहाँ वहीं रुक जाता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

2025 में कितने विवाह मुहूर्त हैं?

Delhi के लिए 2025 में 74 दिन पंचांग शुद्धि पर खरे हैं — पहला गुरुवार, 16 जनवरी 2025 को और अंतिम शनिवार, 6 दिसंबर 2025 को। हर एक ऊपर उसके समय के साथ दिया है।

खरमास और चातुर्मास में विवाह की तारीख़ें क्यों नहीं होतीं?

मुहूर्त ग्रंथ उन महीनों को बंद रखते हैं जिनमें सूर्य धनु और मीन राशि में रहता है (खरमास), और देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक के चार महीनों को (चातुर्मास)। देवउठनी एकादशी के बाद विवाह का मौसम फिर खुलता है।

शुक्र अस्त क्या है, और इसमें विवाह क्यों नहीं होते?

शुक्र तब अस्त होता है जब वह सूर्य के इतने पास होता है कि दिखाई नहीं देता। मुहूर्त चिंतामणि और धर्मसिंधु उस समय विवाह वर्जित करते हैं, और उसके अस्त होने से पहले तथा उदय के बाद के तीन-तीन दिनों में भी; गुरु के लिए भी यही नियम है। शुक्र अस्त: 20 मार्च से 22 मार्च तक; 10 दिसंबर से 1 फ़रवरी 2026 तक।

क्या इस सूची की कोई तारीख़ विवाह तय करने के लिए काफ़ी है?

यह पहला चरण है। यह सूची पंचांग शुद्धि है, और Delhi में सबके लिए एक ही है। परिवार वर-वधू की कुंडलियाँ भी मिलाते हैं और पंडित जी से विवाह के समय का लग्न चुनवाते हैं।