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मुहूर्त

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शास्त्रीय नियम कब कोई अवधि खुली छोड़ते हैं?

प्यू के अनुसार 83% भारतीय ज़रूरी तारीख़ें शुभ मुहूर्त देखकर तय करते हैं — उन 44% से लगभग दोगुने जो कहते हैं कि वे ज्योतिष में विश्वास करते हैं। यही प्रश्न है, और उत्तर वैसे ही जैसे शास्त्र देते हैं: नामित नियमों की सूची, कोई अंक नहीं।

एक बार में छह सप्ताह, क्योंकि मुहूर्त स्वभाव से ही कठोर है और पंद्रह दिनों में अकसर कुछ खुला नहीं मिलता। अवधियाँ उसी स्थान की होती हैं जो आप बताते हैं, क्योंकि हर एक वहाँ के सूर्योदय से नापी जाती है।

कोई भी शुभ कार्य · Delhi, India

अगले 45 में 19 दिन खुले

कोई विशेष कार्य न बताया गया हो तो केवल वर्जनाएँ लागू होती हैं: उग्र और तीक्ष्ण नक्षत्र, रिक्ता तिथियाँ, भद्रा, तीन वर्जित योग और दिन के तीन वर्जित काल।

मंगल, 10 नव॰

प्रतिपदा · विशाखा · शोभन · बव

  • 10:43 – 12:04 लाभ चौघड़िया 81 मिनट
  • 11:43 – 12:04 अभिजित मुहूर्त 22 मिनट
  • 19:08 – 20:47 लाभ चौघड़िया 99 मिनट
  • 22:26 – 00:05 शुभ चौघड़िया 99 मिनट
  • 00:05 – 01:43 अमृत चौघड़िया 99 मिनट

चौघड़िया और अभिजित एक ही दिन को दो अलग तरह से बाँटते हैं, इसलिए जिस अवधि को दोनों नामित करते हैं वह दो बार दिखती है। यह दो परंपराओं का उसे नामित करना है, दोहराव नहीं।

ऊपर से काटा गया: राहु काल 14:47–16:08 · यमगंड 09:22–10:43 · गुलिक काल 12:04–13:26

बुध, 11 नव॰

द्वितीया · अनुराधा · अतिगण्ड · कौलव

  • 06:40 – 08:01 लाभ चौघड़िया 81 मिनट
  • 16:08 – 17:29 लाभ चौघड़िया 81 मिनट
  • 19:08 – 20:47 शुभ चौघड़िया 99 मिनट
  • 20:47 – 22:26 अमृत चौघड़िया 99 मिनट
  • 03:23 – 05:02 लाभ चौघड़िया 99 मिनट

चौघड़िया और अभिजित एक ही दिन को दो अलग तरह से बाँटते हैं, इसलिए जिस अवधि को दोनों नामित करते हैं वह दो बार दिखती है। यह दो परंपराओं का उसे नामित करना है, दोहराव नहीं।

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रवि, 15 नव॰

षष्ठी · उत्तराषाढ़ा · गण्ड · कौलव

  • 09:24 – 10:44 लाभ चौघड़िया 81 मिनट
  • 10:44 – 12:05 अमृत चौघड़िया 81 मिनट
  • 11:44 – 12:05 अभिजित मुहूर्त 21 मिनट
  • 13:26 – 14:46 शुभ चौघड़िया 81 मिनट
  • 17:27 – 19:07 शुभ चौघड़िया 100 मिनट
  • 19:07 – 20:46 अमृत चौघड़िया 100 मिनट
  • 01:45 – 03:24 लाभ चौघड़िया 100 मिनट
  • 05:04 – 06:44 शुभ चौघड़िया 100 मिनट

चौघड़िया और अभिजित एक ही दिन को दो अलग तरह से बाँटते हैं, इसलिए जिस अवधि को दोनों नामित करते हैं वह दो बार दिखती है। यह दो परंपराओं का उसे नामित करना है, दोहराव नहीं।

ऊपर से काटा गया: राहु काल 16:07–17:27 · यमगंड 12:05–13:26 · गुलिक काल 14:46–16:07

सोम, 16 नव॰

सप्तमी · श्रवण · गण्ड · गर

  • 06:44 – 08:04 अमृत चौघड़िया 80 मिनट
  • 09:24 – 10:45 शुभ चौघड़िया 80 मिनट
  • 12:05 – 12:27 अभिजित मुहूर्त 21 मिनट
  • 14:46 – 16:06 लाभ चौघड़िया 80 मिनट
  • 16:06 – 17:27 अमृत चौघड़िया 80 मिनट
  • 22:26 – 00:06 लाभ चौघड़िया 100 मिनट
  • 01:45 – 03:25 शुभ चौघड़िया 100 मिनट
  • 03:25 – 05:05 अमृत चौघड़िया 100 मिनट

चौघड़िया और अभिजित एक ही दिन को दो अलग तरह से बाँटते हैं, इसलिए जिस अवधि को दोनों नामित करते हैं वह दो बार दिखती है। यह दो परंपराओं का उसे नामित करना है, दोहराव नहीं।

ऊपर से काटा गया: राहु काल 08:04–09:24 · यमगंड 10:45–12:05 · गुलिक काल 13:26–14:46

शनि, 21 नव॰

द्वादशी · उत्तरा भाद्रपदा · सिद्धि · बव

  • 08:07 – 09:27 शुभ चौघड़िया 80 मिनट
  • 11:45 – 12:28 अभिजित मुहूर्त 42 मिनट
  • 14:46 – 16:05 अमृत चौघड़िया 80 मिनट
  • 17:25 – 19:05 लाभ चौघड़िया 100 मिनट
  • 20:46 – 22:26 शुभ चौघड़िया 100 मिनट
  • 22:26 – 00:07 अमृत चौघड़िया 100 मिनट
  • 05:08 – 06:48 लाभ चौघड़िया 100 मिनट

चौघड़िया और अभिजित एक ही दिन को दो अलग तरह से बाँटते हैं, इसलिए जिस अवधि को दोनों नामित करते हैं वह दो बार दिखती है। यह दो परंपराओं का उसे नामित करना है, दोहराव नहीं।

ऊपर से काटा गया: राहु काल 09:27–10:47 · यमगंड 13:26–14:46 · गुलिक काल 06:48–08:07

बुध, 25 नव॰

प्रतिपदा · रोहिणी · शिव · कौलव

  • 06:51 – 08:10 लाभ चौघड़िया 79 मिनट
  • 16:05 – 17:24 लाभ चौघड़िया 79 मिनट
  • 19:05 – 20:46 शुभ चौघड़िया 101 मिनट
  • 20:46 – 22:27 अमृत चौघड़िया 101 मिनट
  • 03:30 – 05:11 लाभ चौघड़िया 101 मिनट

चौघड़िया और अभिजित एक ही दिन को दो अलग तरह से बाँटते हैं, इसलिए जिस अवधि को दोनों नामित करते हैं वह दो बार दिखती है। यह दो परंपराओं का उसे नामित करना है, दोहराव नहीं।

ऊपर से काटा गया: राहु काल 12:07–13:27 · यमगंड 08:10–09:29 · गुलिक काल 10:48–12:07

गुरु, 26 नव॰

द्वितीया · मृगशिरा · सिद्ध · गर

  • 11:47 – 12:29 अभिजित मुहूर्त 42 मिनट
  • 12:08 – 13:27 लाभ चौघड़िया 79 मिनट
  • 16:05 – 17:24 शुभ चौघड़िया 79 मिनट
  • 17:24 – 19:05 अमृत चौघड़िया 101 मिनट
  • 00:08 – 01:49 लाभ चौघड़िया 101 मिनट
  • 03:30 – 05:11 शुभ चौघड़िया 101 मिनट
  • 05:11 – 06:52 अमृत चौघड़िया 101 मिनट

चौघड़िया और अभिजित एक ही दिन को दो अलग तरह से बाँटते हैं, इसलिए जिस अवधि को दोनों नामित करते हैं वह दो बार दिखती है। यह दो परंपराओं का उसे नामित करना है, दोहराव नहीं।

ऊपर से काटा गया: राहु काल 13:27–14:46 · यमगंड 06:52–08:11 · गुलिक काल 09:30–10:49

शनि, 28 नव॰

पंचमी · पुनर्वसु · शुक्ल · कौलव

  • 08:12 – 09:31 शुभ चौघड़िया 79 मिनट
  • 11:47 – 12:29 अभिजित मुहूर्त 42 मिनट
  • 14:46 – 16:05 अमृत चौघड़िया 79 मिनट
  • 17:24 – 19:05 लाभ चौघड़िया 101 मिनट
  • 20:46 – 22:27 शुभ चौघड़िया 101 मिनट
  • 22:27 – 00:09 अमृत चौघड़िया 101 मिनट
  • 05:13 – 06:54 लाभ चौघड़िया 101 मिनट

चौघड़िया और अभिजित एक ही दिन को दो अलग तरह से बाँटते हैं, इसलिए जिस अवधि को दोनों नामित करते हैं वह दो बार दिखती है। यह दो परंपराओं का उसे नामित करना है, दोहराव नहीं।

ऊपर से काटा गया: राहु काल 09:31–10:50 · यमगंड 13:27–14:46 · गुलिक काल 06:53–08:12

रवि, 29 नव॰

षष्ठी · पुष्य · ब्रह्म · गर

  • 09:31 – 10:50 लाभ चौघड़िया 79 मिनट
  • 10:50 – 12:09 अमृत चौघड़िया 79 मिनट
  • 11:48 – 12:09 अभिजित मुहूर्त 21 मिनट
  • 13:27 – 14:46 शुभ चौघड़िया 79 मिनट
  • 17:23 – 19:05 शुभ चौघड़िया 101 मिनट
  • 19:05 – 20:46 अमृत चौघड़िया 101 मिनट
  • 01:50 – 03:32 लाभ चौघड़िया 101 मिनट
  • 05:13 – 06:55 शुभ चौघड़िया 101 मिनट

चौघड़िया और अभिजित एक ही दिन को दो अलग तरह से बाँटते हैं, इसलिए जिस अवधि को दोनों नामित करते हैं वह दो बार दिखती है। यह दो परंपराओं का उसे नामित करना है, दोहराव नहीं।

ऊपर से काटा गया: राहु काल 16:05–17:23 · यमगंड 12:09–13:27 · गुलिक काल 14:46–16:05

गुरु, 3 दिस॰

दशमी · उत्तरा फाल्गुनी · प्रीति · वणिज

  • 11:49 – 12:31 अभिजित मुहूर्त 42 मिनट
  • 12:10 – 13:28 लाभ चौघड़िया 78 मिनट
  • 16:05 – 17:23 शुभ चौघड़िया 78 मिनट
  • 17:23 – 19:05 अमृत चौघड़िया 102 मिनट
  • 00:11 – 01:52 लाभ चौघड़िया 102 मिनट
  • 03:34 – 05:16 शुभ चौघड़िया 102 मिनट
  • 05:16 – 06:58 अमृत चौघड़िया 102 मिनट

चौघड़िया और अभिजित एक ही दिन को दो अलग तरह से बाँटते हैं, इसलिए जिस अवधि को दोनों नामित करते हैं वह दो बार दिखती है। यह दो परंपराओं का उसे नामित करना है, दोहराव नहीं।

ऊपर से काटा गया: राहु काल 13:28–14:47 · यमगंड 06:57–08:15 · गुलिक काल 09:34–10:52

शुक्र, 4 दिस॰

एकादशी · हस्त · आयुष्मान · बव

  • 09:34 – 10:52 अमृत चौघड़िया 78 मिनट
  • 12:11 – 12:31 अभिजित मुहूर्त 21 मिनट
  • 12:11 – 13:29 शुभ चौघड़िया 78 मिनट
  • 20:47 – 22:29 लाभ चौघड़िया 102 मिनट
  • 00:11 – 01:53 शुभ चौघड़िया 102 मिनट
  • 01:53 – 03:35 अमृत चौघड़िया 102 मिनट

चौघड़िया और अभिजित एक ही दिन को दो अलग तरह से बाँटते हैं, इसलिए जिस अवधि को दोनों नामित करते हैं वह दो बार दिखती है। यह दो परंपराओं का उसे नामित करना है, दोहराव नहीं।

ऊपर से काटा गया: राहु काल 10:52–12:11 · यमगंड 14:47–16:05 · गुलिक काल 08:16–09:34

शनि, 5 दिस॰

द्वादशी · चित्रा · सौभाग्य · कौलव

  • 08:17 – 09:35 शुभ चौघड़िया 78 मिनट
  • 11:50 – 12:32 अभिजित मुहूर्त 42 मिनट
  • 14:47 – 16:05 अमृत चौघड़िया 78 मिनट
  • 17:24 – 19:06 लाभ चौघड़िया 102 मिनट
  • 20:47 – 22:29 शुभ चौघड़िया 102 मिनट
  • 22:29 – 00:11 अमृत चौघड़िया 102 मिनट
  • 05:17 – 06:59 लाभ चौघड़िया 102 मिनट

चौघड़िया और अभिजित एक ही दिन को दो अलग तरह से बाँटते हैं, इसलिए जिस अवधि को दोनों नामित करते हैं वह दो बार दिखती है। यह दो परंपराओं का उसे नामित करना है, दोहराव नहीं।

ऊपर से काटा गया: राहु काल 09:35–10:53 · यमगंड 13:29–14:47 · गुलिक काल 06:58–08:17

रवि, 6 दिस॰

त्रयोदशी · स्वाती · शोभन · गर

  • 09:35 – 10:53 लाभ चौघड़िया 78 मिनट
  • 10:53 – 12:11 अमृत चौघड़िया 78 मिनट
  • 11:51 – 12:11 अभिजित मुहूर्त 21 मिनट
  • 13:29 – 14:48 शुभ चौघड़िया 78 मिनट
  • 17:24 – 19:06 शुभ चौघड़िया 102 मिनट
  • 19:06 – 20:48 अमृत चौघड़िया 102 मिनट
  • 01:54 – 03:36 लाभ चौघड़िया 102 मिनट
  • 05:18 – 07:00 शुभ चौघड़िया 102 मिनट

चौघड़िया और अभिजित एक ही दिन को दो अलग तरह से बाँटते हैं, इसलिए जिस अवधि को दोनों नामित करते हैं वह दो बार दिखती है। यह दो परंपराओं का उसे नामित करना है, दोहराव नहीं।

ऊपर से काटा गया: राहु काल 16:06–17:24 · यमगंड 12:11–13:29 · गुलिक काल 14:48–16:06

शनि, 12 दिस॰

तृतीया · उत्तराषाढ़ा · वृद्धि · गर

  • 08:21 – 09:39 शुभ चौघड़िया 78 मिनट
  • 11:53 – 12:35 अभिजित मुहूर्त 41 मिनट
  • 14:49 – 16:07 अमृत चौघड़िया 78 मिनट
  • 17:25 – 19:07 लाभ चौघड़िया 102 मिनट
  • 20:50 – 22:32 शुभ चौघड़िया 102 मिनट
  • 22:32 – 00:14 अमृत चौघड़िया 102 मिनट
  • 05:22 – 07:04 लाभ चौघड़िया 102 मिनट

चौघड़िया और अभिजित एक ही दिन को दो अलग तरह से बाँटते हैं, इसलिए जिस अवधि को दोनों नामित करते हैं वह दो बार दिखती है। यह दो परंपराओं का उसे नामित करना है, दोहराव नहीं।

ऊपर से काटा गया: राहु काल 09:39–10:56 · यमगंड 13:32–14:49 · गुलिक काल 07:03–08:21

सोम, 14 दिस॰

पंचमी · श्रवण · व्याघात · बालव

  • 07:05 – 08:22 अमृत चौघड़िया 78 मिनट
  • 09:40 – 10:57 शुभ चौघड़िया 78 मिनट
  • 12:15 – 12:36 अभिजित मुहूर्त 21 मिनट
  • 14:50 – 16:08 लाभ चौघड़िया 78 मिनट
  • 16:08 – 17:25 अमृत चौघड़िया 78 मिनट
  • 22:33 – 00:15 लाभ चौघड़िया 102 मिनट
  • 01:58 – 03:40 शुभ चौघड़िया 102 मिनट
  • 03:40 – 05:23 अमृत चौघड़िया 102 मिनट

चौघड़िया और अभिजित एक ही दिन को दो अलग तरह से बाँटते हैं, इसलिए जिस अवधि को दोनों नामित करते हैं वह दो बार दिखती है। यह दो परंपराओं का उसे नामित करना है, दोहराव नहीं।

ऊपर से काटा गया: राहु काल 08:22–09:40 · यमगंड 10:57–12:15 · गुलिक काल 13:33–14:50

मंगल, 15 दिस॰

षष्ठी · धनिष्ठा · हर्षण · कौलव

  • 10:58 – 12:16 लाभ चौघड़िया 78 मिनट
  • 11:55 – 12:16 अभिजित मुहूर्त 21 मिनट
  • 19:08 – 20:51 लाभ चौघड़िया 103 मिनट
  • 22:33 – 00:16 शुभ चौघड़िया 103 मिनट
  • 00:16 – 01:58 अमृत चौघड़िया 103 मिनट

चौघड़िया और अभिजित एक ही दिन को दो अलग तरह से बाँटते हैं, इसलिए जिस अवधि को दोनों नामित करते हैं वह दो बार दिखती है। यह दो परंपराओं का उसे नामित करना है, दोहराव नहीं।

ऊपर से काटा गया: राहु काल 14:51–16:08 · यमगंड 09:40–10:58 · गुलिक काल 12:16–13:33

बुध, 16 दिस॰

सप्तमी · शतभिषा · वज्र · गर

  • 07:06 – 08:23 लाभ चौघड़िया 78 मिनट
  • 16:09 – 17:26 लाभ चौघड़िया 78 मिनट
  • 19:09 – 20:51 शुभ चौघड़िया 103 मिनट
  • 20:51 – 22:34 अमृत चौघड़िया 103 मिनट
  • 03:41 – 05:24 लाभ चौघड़िया 103 मिनट

चौघड़िया और अभिजित एक ही दिन को दो अलग तरह से बाँटते हैं, इसलिए जिस अवधि को दोनों नामित करते हैं वह दो बार दिखती है। यह दो परंपराओं का उसे नामित करना है, दोहराव नहीं।

ऊपर से काटा गया: राहु काल 12:16–13:34 · यमगंड 08:23–09:41 · गुलिक काल 10:59–12:16

शनि, 19 दिस॰

दशमी · रेवती · वरीयान · तैतिल

  • 08:25 – 09:43 शुभ चौघड़िया 77 मिनट
  • 11:57 – 12:38 अभिजित मुहूर्त 41 मिनट
  • 14:52 – 16:10 अमृत चौघड़िया 77 मिनट
  • 17:27 – 19:10 लाभ चौघड़िया 103 मिनट
  • 20:53 – 22:35 शुभ चौघड़िया 103 मिनट
  • 22:35 – 00:18 अमृत चौघड़िया 103 मिनट
  • 05:26 – 07:08 लाभ चौघड़िया 103 मिनट

चौघड़िया और अभिजित एक ही दिन को दो अलग तरह से बाँटते हैं, इसलिए जिस अवधि को दोनों नामित करते हैं वह दो बार दिखती है। यह दो परंपराओं का उसे नामित करना है, दोहराव नहीं।

ऊपर से काटा गया: राहु काल 09:43–11:00 · यमगंड 13:35–14:52 · गुलिक काल 07:08–08:25

मंगल, 22 दिस॰

त्रयोदशी · कृत्तिका · साध्य · तैतिल

  • 11:02 – 12:19 लाभ चौघड़िया 77 मिनट
  • 11:58 – 12:19 अभिजित मुहूर्त 21 मिनट
  • 19:11 – 20:54 लाभ चौघड़िया 103 मिनट
  • 22:37 – 00:19 शुभ चौघड़िया 103 मिनट
  • 00:19 – 02:02 अमृत चौघड़िया 103 मिनट

चौघड़िया और अभिजित एक ही दिन को दो अलग तरह से बाँटते हैं, इसलिए जिस अवधि को दोनों नामित करते हैं वह दो बार दिखती है। यह दो परंपराओं का उसे नामित करना है, दोहराव नहीं।

ऊपर से काटा गया: राहु काल 14:54–16:11 · यमगंड 09:44–11:02 · गुलिक काल 12:19–13:36

26 दिन बाहर, और क्यों

रवि, 8 नव॰

चतुर्दशी · स्वाती · आयुष्मान · शकुनि

आज कोई अवधि नहीं

चतुर्दशी रिक्ता तिथि है — हर पक्ष की चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी 'रिक्त' मानी जाती हैं और शुभ आरंभ के लिए वर्जित हैं।

सोम, 9 नव॰

अमावस्या · स्वाती · सौभाग्य · नाग

आज कोई अवधि नहीं

अमावस्या। शुभ आरंभ के लिए अमावस्या वर्जित है।

गुरु, 12 नव॰

तृतीया · ज्येष्ठा · सुकर्मा · गर

आज कोई अवधि नहीं

ज्येष्ठा तीक्ष्ण नक्षत्र है, वह वर्ग जिसे शास्त्र शुभ आरंभ के बजाय कठोर या तीक्ष्ण कार्यों के लिए रखते हैं।

शुक्र, 13 नव॰

चतुर्थी · मूल · धृति · वणिज

आज कोई अवधि नहीं

चतुर्थी रिक्ता तिथि है — हर पक्ष की चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी 'रिक्त' मानी जाती हैं और शुभ आरंभ के लिए वर्जित हैं।

मूल तीक्ष्ण नक्षत्र है, वह वर्ग जिसे शास्त्र शुभ आरंभ के बजाय कठोर या तीक्ष्ण कार्यों के लिए रखते हैं।

शनि, 14 नव॰

पंचमी · पूर्वाषाढ़ा · शूल · बव

आज कोई अवधि नहीं

पूर्वाषाढ़ा उग्र नक्षत्र है, वह वर्ग जिसे शास्त्र शुभ आरंभ के बजाय कठोर या तीक्ष्ण कार्यों के लिए रखते हैं।

मंगल, 17 नव॰

अष्टमी · धनिष्ठा · वृद्धि · विष्टि

आज कोई अवधि नहीं

इस दिन विष्टि करण चलता है, जिसे भद्रा कहते हैं, और यह पूर्णतः वर्जित है।

बुध, 18 नव॰

नवमी · शतभिषा · ध्रुव · बालव

आज कोई अवधि नहीं

नवमी रिक्ता तिथि है — हर पक्ष की चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी 'रिक्त' मानी जाती हैं और शुभ आरंभ के लिए वर्जित हैं।

गुरु, 19 नव॰

नवमी · पूर्वा भाद्रपदा · व्याघात · कौलव

आज कोई अवधि नहीं

नवमी रिक्ता तिथि है — हर पक्ष की चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी 'रिक्त' मानी जाती हैं और शुभ आरंभ के लिए वर्जित हैं।

पूर्वा भाद्रपदा उग्र नक्षत्र है, वह वर्ग जिसे शास्त्र शुभ आरंभ के बजाय कठोर या तीक्ष्ण कार्यों के लिए रखते हैं।

शुक्र, 20 नव॰

दशमी · पूर्वा भाद्रपदा · वज्र · गर

आज कोई अवधि नहीं

पूर्वा भाद्रपदा उग्र नक्षत्र है, वह वर्ग जिसे शास्त्र शुभ आरंभ के बजाय कठोर या तीक्ष्ण कार्यों के लिए रखते हैं।

रवि, 22 नव॰

त्रयोदशी · अश्विनी · व्यतीपात · कौलव

आज कोई अवधि नहीं

व्यतीपात योग, उन तीन में से एक जिन्हें मुहूर्त ग्रंथ लगभग सर्वसम्मति से वर्जित मानते हैं।

सोम, 23 नव॰

चतुर्दशी · भरणी · वरीयान · गर

आज कोई अवधि नहीं

चतुर्दशी रिक्ता तिथि है — हर पक्ष की चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी 'रिक्त' मानी जाती हैं और शुभ आरंभ के लिए वर्जित हैं।

भरणी उग्र नक्षत्र है, वह वर्ग जिसे शास्त्र शुभ आरंभ के बजाय कठोर या तीक्ष्ण कार्यों के लिए रखते हैं।

मंगल, 24 नव॰

पूर्णिमा · कृत्तिका · परिघ · विष्टि

आज कोई अवधि नहीं

इस दिन विष्टि करण चलता है, जिसे भद्रा कहते हैं, और यह पूर्णतः वर्जित है।

परिघ योग, उन तीन में से एक जिन्हें मुहूर्त ग्रंथ लगभग सर्वसम्मति से वर्जित मानते हैं।

शुक्र, 27 नव॰

तृतीया · आर्द्रा · शुभ · विष्टि

आज कोई अवधि नहीं

इस दिन विष्टि करण चलता है, जिसे भद्रा कहते हैं, और यह पूर्णतः वर्जित है।

आर्द्रा तीक्ष्ण नक्षत्र है, वह वर्ग जिसे शास्त्र शुभ आरंभ के बजाय कठोर या तीक्ष्ण कार्यों के लिए रखते हैं।

सोम, 30 नव॰

सप्तमी · अश्लेषा · इन्द्र · विष्टि

आज कोई अवधि नहीं

इस दिन विष्टि करण चलता है, जिसे भद्रा कहते हैं, और यह पूर्णतः वर्जित है।

अश्लेषा तीक्ष्ण नक्षत्र है, वह वर्ग जिसे शास्त्र शुभ आरंभ के बजाय कठोर या तीक्ष्ण कार्यों के लिए रखते हैं।

मंगल, 1 दिस॰

अष्टमी · मघा · वैधृति · बालव

आज कोई अवधि नहीं

वैधृति योग, उन तीन में से एक जिन्हें मुहूर्त ग्रंथ लगभग सर्वसम्मति से वर्जित मानते हैं।

मघा उग्र नक्षत्र है, वह वर्ग जिसे शास्त्र शुभ आरंभ के बजाय कठोर या तीक्ष्ण कार्यों के लिए रखते हैं।

बुध, 2 दिस॰

नवमी · पूर्वा फाल्गुनी · विष्कम्भ · तैतिल

आज कोई अवधि नहीं

नवमी रिक्ता तिथि है — हर पक्ष की चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी 'रिक्त' मानी जाती हैं और शुभ आरंभ के लिए वर्जित हैं।

पूर्वा फाल्गुनी उग्र नक्षत्र है, वह वर्ग जिसे शास्त्र शुभ आरंभ के बजाय कठोर या तीक्ष्ण कार्यों के लिए रखते हैं।

सोम, 7 दिस॰

चतुर्दशी · विशाखा · अतिगण्ड · विष्टि

आज कोई अवधि नहीं

चतुर्दशी रिक्ता तिथि है — हर पक्ष की चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी 'रिक्त' मानी जाती हैं और शुभ आरंभ के लिए वर्जित हैं।

इस दिन विष्टि करण चलता है, जिसे भद्रा कहते हैं, और यह पूर्णतः वर्जित है।

मंगल, 8 दिस॰

अमावस्या · अनुराधा · सुकर्मा · चतुष्पद

आज कोई अवधि नहीं

अमावस्या। शुभ आरंभ के लिए अमावस्या वर्जित है।

बुध, 9 दिस॰

प्रतिपदा · ज्येष्ठा · धृति · किंस्तुघ्न

आज कोई अवधि नहीं

ज्येष्ठा तीक्ष्ण नक्षत्र है, वह वर्ग जिसे शास्त्र शुभ आरंभ के बजाय कठोर या तीक्ष्ण कार्यों के लिए रखते हैं।

गुरु, 10 दिस॰

प्रतिपदा · मूल · शूल · बव

आज कोई अवधि नहीं

मूल तीक्ष्ण नक्षत्र है, वह वर्ग जिसे शास्त्र शुभ आरंभ के बजाय कठोर या तीक्ष्ण कार्यों के लिए रखते हैं।

शुक्र, 11 दिस॰

द्वितीया · पूर्वाषाढ़ा · गण्ड · कौलव

आज कोई अवधि नहीं

पूर्वाषाढ़ा उग्र नक्षत्र है, वह वर्ग जिसे शास्त्र शुभ आरंभ के बजाय कठोर या तीक्ष्ण कार्यों के लिए रखते हैं।

रवि, 13 दिस॰

चतुर्थी · श्रवण · ध्रुव · विष्टि

आज कोई अवधि नहीं

चतुर्थी रिक्ता तिथि है — हर पक्ष की चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी 'रिक्त' मानी जाती हैं और शुभ आरंभ के लिए वर्जित हैं।

इस दिन विष्टि करण चलता है, जिसे भद्रा कहते हैं, और यह पूर्णतः वर्जित है।

गुरु, 17 दिस॰

अष्टमी · पूर्वा भाद्रपदा · सिद्धि · विष्टि

आज कोई अवधि नहीं

इस दिन विष्टि करण चलता है, जिसे भद्रा कहते हैं, और यह पूर्णतः वर्जित है।

पूर्वा भाद्रपदा उग्र नक्षत्र है, वह वर्ग जिसे शास्त्र शुभ आरंभ के बजाय कठोर या तीक्ष्ण कार्यों के लिए रखते हैं।

शुक्र, 18 दिस॰

नवमी · उत्तरा भाद्रपदा · व्यतीपात · बालव

आज कोई अवधि नहीं

नवमी रिक्ता तिथि है — हर पक्ष की चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी 'रिक्त' मानी जाती हैं और शुभ आरंभ के लिए वर्जित हैं।

व्यतीपात योग, उन तीन में से एक जिन्हें मुहूर्त ग्रंथ लगभग सर्वसम्मति से वर्जित मानते हैं।

रवि, 20 दिस॰

एकादशी · अश्विनी · परिघ · वणिज

आज कोई अवधि नहीं

परिघ योग, उन तीन में से एक जिन्हें मुहूर्त ग्रंथ लगभग सर्वसम्मति से वर्जित मानते हैं।

सोम, 21 दिस॰

द्वादशी · भरणी · सिद्ध · बालव

आज कोई अवधि नहीं

भरणी उग्र नक्षत्र है, वह वर्ग जिसे शास्त्र शुभ आरंभ के बजाय कठोर या तीक्ष्ण कार्यों के लिए रखते हैं।

यह कैसे निकाला गया। शास्त्रीय नियम जो अवधियाँ खुली छोड़ते हैं, वही — कोई अंक नहीं। हर एक वह अवधि है जिसे परंपरा शुभ कहती है, जिसमें से दिन के तीन वर्जित काल काट दिए गए हैं, और वह भी उसी दिन जिसे कोई दिन-स्तरीय नियम बाहर नहीं करता। यहाँ कुछ भी तौला या क्रम में नहीं रखा गया।

सामान्य मुहूर्त किसी नामित कार्य के लिए चुने गए मुहूर्त से कमज़ोर होता है।

यह साफ़ कह देना ज़रूरी है

यह क्या नहीं करता

  • यह किसी दिन को अंक नहीं देता। न कोई प्रतिशत, न रेटिंग, न “सबसे अच्छा समय”। शास्त्र कारक बताते हैं, उनका भार नहीं; कोई भी भार किसी की राय है जिसे गणित का रूप दे दिया गया हो। यहाँ हर अवधि बताती है कि किस नियम ने उसे नामित किया, और हर बाहर हुआ दिन बताता है कि किस नियम ने उसे बाहर किया।
  • इसमें शामिल नहीं। विवाह। किसी तारीख़ का अर्थ होने से पहले दोनों कुंडलियाँ, अष्टकूट पाठ और दोनों ओर मंगल दोष देखना ज़रूरी है, और आधा विवाह-मुहूर्त न होने से बुरा है।
  • इसमें शामिल नहीं। कोई भी चिकित्सकीय, क़ानूनी या आर्थिक बात। कोई तारीख़ दूसरी राय नहीं होती।
  • इसमें शामिल नहीं। आपकी अपनी कुंडली। शास्त्रीय पद्धति मुहूर्त को दिन के साथ-साथ जन्म के चंद्रमा के सापेक्ष भी जाँचती है, और उसके लिए जन्म समय चाहिए।

आपकी अपनी कुंडली के सापेक्ष

शास्त्रीय पद्धति मुहूर्त को दिन के साथ-साथ जन्म के चंद्रमा के सापेक्ष भी जाँचती है। उसके लिए आपका जन्म समय चाहिए, और यही इस साइट का बाक़ी हिस्सा निकालता है।