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पंचांग

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Haridwar, Uttarakhand में आने वाला सप्ताह

हर दिन के पाँच अंग, उसके त्योहार और व्रत, वे काल जिन्हें परंपरा वर्जित मानती है, और वह एक जिसे शुभ — इस स्थान पर सूर्य और चंद्र की वास्तविक स्थिति से गणना किए गए, और हर संक्रमण का समय अनुमान से नहीं, खोजकर निकाला गया।

अगले सात दिन

रविवार आज

8 नवंबर

  • दीवाली · लक्ष्मी पूजा

    इस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में अमावस्या है।

  • नरक चतुर्दशी · छोटी दीवाली

    इस दिन अरुणोदय (सूर्योदय से पहले) के समय कृष्ण चतुर्दशी है।

  • दर्श अमावस्या
तिथि
चतुर्दशी11:28 तक · फिर अमावस्या
नक्षत्र
स्वाती07:24 (9 नव॰) तक
योग
आयुष्मान03:03 (9 नव॰) तक · फिर सौभाग्य
करण
शकुनि11:28 तक · फिर चतुष्पद 23:57 तक · फिर नाग
सूर्योदय
06:36
सूर्यास्त
17:25
चंद्रोदय
06:33
चंद्रास्त
16:33

शुभ

  • अभिजित मुहूर्त11:39 – 12:22

शास्त्रानुसार वर्जित

  • राहु काल16:04 – 17:25
  • यमगंड12:00 – 13:22
  • गुलिक काल14:43 – 16:04
  • कृष्ण पक्ष

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सोमवार

9 नवंबर

  • कार्तिक अमावस्या
तिथि
अमावस्या12:32 तक · फिर प्रतिपदा
नक्षत्र
स्वाती07:24 तक · फिर विशाखा
योग
सौभाग्य02:57 (10 नव॰) तक · फिर शोभन
करण
नाग12:32 तक · फिर किंस्तुघ्न 01:13 (10 नव॰) तक · फिर बव
सूर्योदय
06:36
सूर्यास्त
17:25
चंद्रोदय
07:33
चंद्रास्त
17:09

शुभ

  • अभिजित मुहूर्त11:39 – 12:22

शास्त्रानुसार वर्जित

  • राहु काल07:57 – 09:18
  • यमगंड10:39 – 12:00
  • गुलिक काल13:22 – 14:43
  • कृष्ण पक्ष

मंगलवार

10 नवंबर

  • गोवर्धन पूजा

    इस दिन सूर्योदय के समय शुक्ल प्रतिपदा है।

तिथि
प्रतिपदा14:00 तक · फिर द्वितीया
नक्षत्र
विशाखा09:19 तक · फिर अनुराधा
योग
शोभन03:09 (11 नव॰) तक · फिर अतिगण्ड
करण
बव14:00 तक · फिर बालव 02:54 (11 नव॰) तक · फिर कौलव
सूर्योदय
06:37
सूर्यास्त
17:24
चंद्रोदय
07:33
चंद्रास्त
17:49

शुभ

  • अभिजित मुहूर्त11:39 – 12:22

शास्त्रानुसार वर्जित

  • राहु काल14:42 – 16:03
  • यमगंड09:19 – 10:40
  • गुलिक काल12:01 – 13:21
  • शुक्ल पक्ष

बुधवार

11 नवंबर

  • भाई दूज

    शुक्ल द्वितीया दो दिन अपराह्न में है, इस दिन अधिक समय तक।

तिथि
द्वितीया15:53 तक · फिर तृतीया
नक्षत्र
अनुराधा11:38 तक · फिर ज्येष्ठा
योग
अतिगण्ड03:40 (12 नव॰) तक · फिर सुकर्मा
करण
कौलव15:53 तक · फिर तैतिल 04:59 (12 नव॰) तक · फिर गर
सूर्योदय
06:38
सूर्यास्त
17:23
चंद्रोदय
08:31
चंद्रास्त
18:35

शुभ

  • अभिजित मुहूर्त11:39 – 12:22

शास्त्रानुसार वर्जित

  • राहु काल12:01 – 13:21
  • यमगंड07:59 – 09:19
  • गुलिक काल10:40 – 12:01
  • शुक्ल पक्ष
  • अतिगण्ड योग: शास्त्रानुसार अशुभ

गुरुवार

12 नवंबर

तिथि
तृतीया18:09 तक · फिर चतुर्थी
नक्षत्र
ज्येष्ठा14:19 तक · फिर मूल
योग
सुकर्मा04:26 (13 नव॰) तक · फिर धृति
करण
गर18:09 तक · फिर वणिज
सूर्योदय
06:39
सूर्यास्त
17:23
चंद्रोदय
09:25
चंद्रास्त
19:25

शुभ

  • अभिजित मुहूर्त11:39 – 12:22

शास्त्रानुसार वर्जित

  • राहु काल13:21 – 14:42
  • यमगंड06:39 – 07:59
  • गुलिक काल09:20 – 10:40
  • शुक्ल पक्ष

शुक्रवार

13 नवंबर

  • विनायक चतुर्थी
तिथि
चतुर्थी20:43 तक · फिर पंचमी
नक्षत्र
मूल17:17 तक · फिर पूर्वाषाढ़ा
योग
धृति05:22 (14 नव॰) तक · फिर शूल
करण
वणिज07:24 तक · फिर विष्टि 20:43 तक · फिर बव
सूर्योदय
06:40
सूर्यास्त
17:22
चंद्रोदय
10:15
चंद्रास्त
20:19

शुभ

  • अभिजित मुहूर्त11:40 – 12:22

शास्त्रानुसार वर्जित

  • राहु काल10:41 – 12:01
  • यमगंड14:42 – 16:02
  • गुलिक काल08:00 – 09:20
  • शुक्ल पक्ष

शनिवार

14 नवंबर

तिथि
पंचमी23:24 तक · फिर षष्ठी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा20:24 तक · फिर उत्तराषाढ़ा
योग
शूल06:22 (15 नव॰) तक · फिर गण्ड
करण
बव10:03 तक · फिर बालव 23:24 तक · फिर कौलव
सूर्योदय
06:41
सूर्यास्त
17:22
चंद्रोदय
11:00
चंद्रास्त
21:15

शुभ

  • अभिजित मुहूर्त11:40 – 12:22

शास्त्रानुसार वर्जित

  • राहु काल09:21 – 10:41
  • यमगंड13:21 – 14:41
  • गुलिक काल06:41 – 08:01
  • शुक्ल पक्ष
  • शूल योग: शास्त्रानुसार अशुभ

अगले दो महीनों के त्योहार और व्रत

Haridwar, Uttarakhand के लिए। तिथि 19 से 26 घंटे की होती है और किसी भी समय आरंभ होती है, इसलिए अधिकांश तिथियाँ दो दिनों को छूती हैं। हर पर्व की तिथि दिन के एक निश्चित भाग में होनी चाहिए — दीवाली के लिए सूर्यास्त के बाद का प्रदोष, जन्माष्टमी के लिए मध्यरात्रि, करवा चौथ के लिए चंद्रोदय — और पर्व उसी दिन होता है जिस दिन तिथि उस भाग में हो। हर प्रविष्टि यह बताती है।

त्योहार

  1. दीवाली · लक्ष्मी पूजा

    अमावस्या: 8 नव॰, 11:28 से 9 नव॰, 12:32 तक

    इस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में अमावस्या है।

  2. नरक चतुर्दशी · छोटी दीवाली

    कृष्ण चतुर्दशी: 7 नव॰, 10:48 से 8 नव॰, 11:28 तक

    इस दिन अरुणोदय (सूर्योदय से पहले) के समय कृष्ण चतुर्दशी है।

  3. गोवर्धन पूजा

    शुक्ल प्रतिपदा: 9 नव॰, 12:32 से 10 नव॰, 14:00 तक

    इस दिन सूर्योदय के समय शुक्ल प्रतिपदा है।

  4. भाई दूज

    शुक्ल द्वितीया: 10 नव॰, 14:00 से 11 नव॰, 15:53 तक

    शुक्ल द्वितीया दो दिन अपराह्न में है, इस दिन अधिक समय तक।

  5. छठ पूजा

    शुक्ल षष्ठी: 14 नव॰, 23:24 से 16 नव॰, 02:01 तक

    इस दिन सूर्यास्त के समय शुक्ल षष्ठी है।

  6. वृश्चिक संक्रांति

    इस दिन 19:43 पर सूर्य वृश्चिक में प्रवेश करता है।

  7. कंस वध

    शुक्ल दशमी: 19 नव॰, 07:06 से 20 नव॰, 07:16 तक

    इस दिन सूर्योदय के समय शुक्ल दशमी है।

  8. तुलसी विवाह

    शुक्ल द्वादशी: 21 नव॰, 06:32 से 22 नव॰, 04:57 तक

    इस दिन सूर्योदय के समय शुक्ल द्वादशी है।

  9. कार्तिक पूर्णिमा

    पूर्णिमा: 23 नव॰, 23:42 से 24 नव॰, 20:23 तक

    इस दिन सूर्योदय के समय पूर्णिमा है।

  10. कालभैरव जयंती

    कृष्ण अष्टमी: 1 दिस॰, 00:12 से 1 दिस॰, 23:14 तक

    इस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में कृष्ण अष्टमी है।

  11. विवाह पंचमी

    शुक्ल पंचमी: 13 दिस॰, 16:48 से 14 दिस॰, 19:16 तक

    इस दिन सूर्योदय के समय शुक्ल पंचमी है।

  12. धनु संक्रांति

    इस दिन 10:25 पर सूर्य धनु में प्रवेश करता है।

  13. गीता जयंती

    शुक्ल एकादशी: 19 दिस॰, 22:09 से 20 दिस॰, 20:15 तक

    इस दिन सूर्योदय के समय शुक्ल एकादशी है।

  14. दत्तात्रेय जयंती

    पूर्णिमा: 23 दिस॰, 10:47 से 24 दिस॰, 06:58 तक

    इस बार पूर्णिमा किसी भी दिन सूर्योदय के समय नहीं है, इसलिए जिस दिन यह आरंभ होती है उसी दिन मनाया जाता है।

मासिक व्रत

  1. दर्श अमावस्या

    अमावस्या: 8 नव॰, 11:28 से 9 नव॰, 12:32 तक

    इस दिन अपराह्न में अमावस्या है।

  2. कार्तिक अमावस्या

    अमावस्या: 8 नव॰, 11:28 से 9 नव॰, 12:32 तक

    इस दिन सूर्योदय के समय अमावस्या है।

  3. विनायक चतुर्थी

    शुक्ल चतुर्थी: 12 नव॰, 18:09 से 13 नव॰, 20:43 तक

    इस दिन मध्याह्न में शुक्ल चतुर्थी है।

  4. देवउठनी एकादशी

    शुक्ल एकादशी: 20 नव॰, 07:16 से 21 नव॰, 06:32 तक

    एकादशी दो सूर्योदयों के बीच ही आरंभ और समाप्त होती है, इसलिए जिस दिन यह आरंभ होती है उसी दिन व्रत है।

  5. गौण देवउठनी एकादशी

    शुक्ल एकादशी: 20 नव॰, 07:16 से 21 नव॰, 06:32 तक

    इस बार एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, इसलिए कठोर व्रत रखने वाले (वैष्णव और संन्यासी) इसे अगले दिन, आज, रखते हैं।

  6. रवि प्रदोष व्रत

    शुक्ल त्रयोदशी: 22 नव॰, 04:57 से 23 नव॰, 02:37 तक

    इस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में शुक्ल त्रयोदशी है।

  7. कार्तिक पूर्णिमा व्रत

    पूर्णिमा: 23 नव॰, 23:42 से 24 नव॰, 20:23 तक

    इस दिन अपराह्न में पूर्णिमा है।

  8. संकष्टी चतुर्थी

    कृष्ण चतुर्थी: 27 नव॰, 09:49 से 28 नव॰, 06:40 तक

    इस दिन चंद्रोदय के समय कृष्ण चतुर्थी है।

  9. उत्पन्ना एकादशी

    कृष्ण एकादशी: 3 दिस॰, 23:04 से 4 दिस॰, 23:45 तक

    इस दिन सूर्योदय के समय एकादशी है।

  10. रवि प्रदोष व्रत

    कृष्ण त्रयोदशी: 6 दिस॰, 00:52 से 7 दिस॰, 02:22 तक

    इस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में कृष्ण त्रयोदशी है।

  11. मासिक शिवरात्रि

    कृष्ण चतुर्दशी: 7 दिस॰, 02:22 से 8 दिस॰, 04:13 तक

    इस दिन निशीथ काल (मध्यरात्रि) में कृष्ण चतुर्दशी है।

  12. मार्गशीर्ष अमावस्या

    अमावस्या: 8 दिस॰, 04:13 से 9 दिस॰, 06:21 तक

    इस दिन सूर्योदय के समय अमावस्या है।

  13. विनायक चतुर्थी

    शुक्ल चतुर्थी: 12 दिस॰, 14:06 से 13 दिस॰, 16:48 तक

    इस दिन मध्याह्न में शुक्ल चतुर्थी है।

  14. मोक्षदा एकादशी

    शुक्ल एकादशी: 19 दिस॰, 22:09 से 20 दिस॰, 20:15 तक

    इस दिन सूर्योदय के समय एकादशी है।

  15. सोम प्रदोष व्रत

    शुक्ल त्रयोदशी: 21 दिस॰, 17:36 से 22 दिस॰, 14:24 तक

    इस दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में शुक्ल त्रयोदशी है।

  16. मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत

    पूर्णिमा: 23 दिस॰, 10:47 से 24 दिस॰, 06:58 तक

    इस दिन अपराह्न में पूर्णिमा है।

  17. संकष्टी चतुर्थी

    कृष्ण चतुर्थी: 26 दिस॰, 20:05 से 27 दिस॰, 17:13 तक

    इस दिन चंद्रोदय के समय कृष्ण चतुर्थी है।

  18. सफला एकादशी

    कृष्ण एकादशी: 2 जन॰, 14:24 से 3 जन॰, 16:08 तक

    इस दिन सूर्योदय के समय एकादशी है।

  19. मासिक शिवरात्रि

    कृष्ण चतुर्दशी: 5 जन॰, 20:40 से 6 जन॰, 23:14 तक

    इस दिन निशीथ काल (मध्यरात्रि) में कृष्ण चतुर्दशी है।

  20. भौम प्रदोष व्रत

    कृष्ण त्रयोदशी: 4 जन॰, 18:16 से 5 जन॰, 20:40 तक

    कृष्ण त्रयोदशी दो दिन प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद) में है, इस दिन अधिक समय तक।

2026 के सभी त्योहार और व्रत →

दूसरे शहरों का पंचांग

इसे कैसे पढ़ें, और यह क्या नहीं करेगा

त्योहारों की तिथियाँ उन्हीं नियमों से निकलती हैं जिनसे द्रिक पंचांग निकालता है, और नई दिल्ली के लिए उसके कैलेंडर से जाँची गई हैं: 2026 और 2027 का हर त्योहार और व्रत, और 2021 से 2031 तक हर वर्ष के बारह प्रमुख त्योहार। जहाँ कोई त्योहार दो दिन पड़ सकता है, उसके साथ छपा कारण ही वह नियम है जिसने निर्णय किया। जो क्षेत्रीय कैलेंडर महीने अलग ढंग से गिनते हैं या वैष्णव पद्धति मानते हैं, वे कुछ पर्व दूसरे दिन रख सकते हैं।

यहाँ कोई अंक नहीं है। आपको यहाँ कोई दिन “82% शुभ” नहीं मिलेगा, न हरा निशान, न सप्ताह की अच्छे-से-बुरे क्रम में सूची। शास्त्र कारक देते हैं — तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार — और उन्हें आपस में तौलने का कोई सूत्र नहीं देते। जो अंक आपने कहीं और देखे हैं, वे किसी की राय हैं, गणित के भेस में।

राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वे काल हैं जिन्हें शास्त्रीय पद्धति किसी कार्य के आरंभ के लिए वर्जित मानती है। ये सूर्योदय और सूर्यास्त से निकलते हैं, इसलिए वर्ष भर बदलते रहते हैं और हर शहर में अलग होते हैं — इसीलिए यह पृष्ठ पूछता है कि आप कहाँ हैं।

अभिजित मुहूर्त दिन के पंद्रह मुहूर्तों में आठवाँ है, लगभग सौर मध्याह्न के आसपास, और यही वह काल है जिसे कार्यारंभ के लिए सबसे व्यापक रूप से शुभ माना जाता है।

जहाँ किसी दिन की तिथि या योग अपने साथ कोई शास्त्रीय चेतावनी रखता है, वह परंपरा की टिप्पणी के रूप में छपी है, हमारे निर्णय के रूप में नहीं। यह पृष्ठ किसी भी दिन क्या होगा, यह नहीं बताता।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पंचांग क्या है?

दिन के पाँच अंग, और शब्द का अर्थ भी यही है: तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार। हर अंग किसी विशेष स्थान पर सूर्य और चंद्रमा की वास्तविक स्थितियों से गणना होता है, इसलिए पंचांग हमेशा किसी जगह का होता है, और उनके बीच के संक्रमण अनुमानित नहीं, खोजे जाते हैं।

राहु काल क्या है, और क्या उससे बचना ज़रूरी है?

हर दिन लगभग नब्बे मिनट की एक अवधि, जो सूर्योदय और वार से निकाली जाती है। परंपरा उसमें कोई नया शुभ कार्य आरंभ करने से बचती है, और रोज़मर्रा का काम यथावत चलता रहता है। यह यहाँ इसलिए दिखाया जाता है कि लोग इसे पूछते हैं, उस नियम के साथ जिससे यह निकला — आपके दिन के बारे में चेतावनी के रूप में नहीं।

अभिजित मुहूर्त क्या है?

स्थानीय मध्याह्न के आसपास की अवधि, जो सूर्य के उच्चतम बिंदु पर केंद्रित होती है और जिसे परंपरा सामान्यतः अनुकूल मानती है। यह पृष्ठ उसे वर्जित अवधियों के बाद नहीं, साथ में दिखाता है। यह हर दिन लागू नहीं होती, और जहाँ कोई नियम उसे रोकता है वहाँ पृष्ठ बताता है कि कौन सा नियम।

दिन का कोई अंक क्यों नहीं दिया जाता?

क्योंकि शास्त्र कारक बताते हैं, उन्हें आपस में तौलने का सूत्र नहीं देते। इसलिए कोई प्रतिशत या हरा निशान किसी की अपनी गढ़ी हुई बात है जिसे पाठ बताकर पेश किया जाता है। पाँचों अंग और अवधियाँ दिखा दी जाती हैं, और उनसे क्या निकालना है यह वहीं छोड़ दिया जाता है जहाँ परंपरा छोड़ती है।

यह पंचांग मेरे स्थानीय कैलेंडर से अलग क्यों है?

प्रायः तीन में से किसी एक कारण से। तिथि किसी क्षण की होती है, पूरे दिन की नहीं, इसलिए सूर्योदय के आसपास बदलने पर दो कैलेंडर उसे अलग दिन दे सकते हैं। महीना कुछ क्षेत्रों में अमावस्या से गिना जाता है और कुछ में पूर्णिमा से। और स्थान मायने रखता है, क्योंकि सूर्योदय मायने रखता है। प्रयुक्त स्थान और गणना-पद्धति, दोनों पृष्ठ पर बताए जाते हैं।

त्योहारों की तिथियाँ कैसे तय होती हैं?

तिथि से, और दिन के उस भाग से जिसमें उसका होना आवश्यक है। दीवाली के लिए सूर्यास्त के बाद प्रदोष में अमावस्या चाहिए, जन्माष्टमी के लिए मध्यरात्रि में अष्टमी, और रोहिणी नक्षत्र हो तो उसे प्राथमिकता, करवा चौथ के लिए चंद्रोदय पर चतुर्थी, और रक्षा बंधन के लिए सूर्योदय के बाद तीन मुहूर्त तक पूर्णिमा। जब तिथि दो दिन उस भाग में हो, या किसी भी दिन नहीं, तो शास्त्रीय नियम निर्णय करता है, और इस पृष्ठ की हर तिथि बताती है कि किस नियम ने उसे चुना।